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    सिर्फ मां लक्ष्मी ही नहीं, दक्षिण भारत में धन-समृद्धि के लिए पूजे जाते हैं ये 5 देवी-देवता

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 06:30 PM (IST)

    दक्षिण भारत में कई ऐसे देवी-देवता हैं जिनकी पूजा धन और समृद्धि के लिए की जाती है। भगवान वेंकटेश्वर, अष्टलक्ष्मी, देवी पद्मावतीइनमें प्रमुख हैं, जो भक् ...और पढ़ें

    दक्षिण भारत के 5 देवता जिन्हें धन और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। (Picture Credits- AI Image)

    दक्षिण भारत के 5 देवता जिन्हें धन और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। (Picture Credits- AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर इंसान जीवन में पैसा और समृद्धि की चाह रखता है। जब कभी भी हम धन, यश, समृद्धि या भौतिक सुख की कामना करते हैं हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम मां लक्ष्मी का ही आता है। हालांकि उत्तर भारत के विपरीत दक्षिण भारत में कई ऐसे देवी-देवता हैं जिनकी पूजा करने से आर्थिक स्थिरता, संपन्नता, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    इन देवताओं के पास भक्त बेहतर करियर, बिजनेस अवसर और आर्थिक कल्याण के उद्देश्य से मंदिरों में दर्शन कर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं दक्षिण भारत में 5 ऐसे देवी-देवताओं के बारे में जिन्हें धन और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।

    भगवान वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी)

    भगवान वेंकटेश्वर को भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है, जिनकी पूजा दक्षिण भारत में व्यापक रूप से की जाती है। उन्हें तिरुपति बालाजी, श्रीनिवास और गोविंद जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में स्थित उनका मंदिर दुनिया के सबसे समृद्धि और पवित्र तीर्थ स्थलों में शामिल है।

    भगवान वेंकटेश्वर को आध्यात्मिकता के साथ-साथ भौतिक सुख-सुविधा और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। भक्तों का मानना है कि, उनकी पूजा करने से जीवन में सौभाग्य, सफलता और शांति की प्राप्ति होती है।

    देवी अष्टलक्ष्मी

    दक्षिण भारत में देवी लक्ष्मी के सबसे पूजनीय रूपों में अष्टलक्ष्मी जी शामिल हैं। अष्ट लक्ष्मी नाम का मतलब लक्ष्मी के आठ रूप जिनमें से हर एख समृद्धि के अलग प्रकार का प्रतिनिधित्व करता है।

    इनमें आदि लक्ष्मी आध्यात्मिक धन, धना लक्ष्मी, भौतिक सुख, धान्य लक्ष्मी भोजन और पोषण, गज लक्ष्मी शक्ति और राजत्व, संतान लक्ष्मी संतान और परिवार, वीर लक्ष्मी हिम्मत, विजय लक्ष्मी जीत औ विद्या लक्ष्मी ज्ञान का प्रतीक है।

    देवी पद्मावती

    देवी पद्मावती को तमिल में अलमेलु और तेलुगु में अलमेलुमंगा के नाम से भी जाना जाता है। देवी पद्मावत दक्षिण भारत में व्यापक रूप से पूजी जाने वाली देवियों में शामिल है।

    उन्हें देवी लक्ष्मी का अवतार और भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी माना जाता है। वे पैसा, समृद्धि और करुण की देवी भी हैं और वैष्णव परंपराओं में उनका खास स्थान है। दक्षिण भारत में उनके कई मंदिर हैं, जिसमें आंध्र प्रदेश के तिरुचनूर में श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर शामिल है।

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    देवी कनक दुर्गा

    देवी कनक दुर्गा को आदि पराशक्ति का दिव्य रूप माना जाता है। उनकी पूजा आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित कनक दुर्गा मंदिर में की जाती है, जहां उन्हें स्वयंभू माना जाता है।

    भक्तों का मानना है कि, सच्चे मन से उनकी पूजा करने से डर दूर होने के साथ शक्ति मिलती है और जीवन में सबसे मुश्किल दौर से उबरने में मदद मिलती है। देवी कनक दुर्गा की पूजा भक्त सुरक्षा, धन और समृद्धि के लिए भी करते हैं।

    भगवान कुबेर

    भगवान कुबेर को धन और समृद्धि का देवता माना जाता है। उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष भी कहा जाता है। माना जाता है कि, जो लोग श्रद्धा और निष्ठा से भगवान कुबेर की पूजा करते हैं, उन्हें आर्थिक स्थिरता, समृद्धि और सफलता हासिल होती है। भक्त आमतौर पर कई अवसरों पर देवी लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की भी पूजा करते हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।