मन्नत पूरी होने पर मोम के पुतले और सोने-चांदी के अंग! जानें भारत के इन चमत्कारी चर्चों की अनोखी परंपराएं
भारत में ऐसे कई ऐतिहासिक चर्च हैं जहां विभिन्न धर्मों के लोग अपनी मुरादें पूरी होने पर अनोखे चढ़ावे अर्पित ...और पढ़ें

भारत के अनोखे चर्च
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत जहां अलग-अलग धर्म और सांस्कृतिक विविधता के लोग एक साथ रहते हैं, जहां अनेकों मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और धार्मिक स्थल एक साथ देखने को मिलते हैं। इन्हीं में शामिल है देश के कुछ ऐतिहासिक चर्च जो सिर्फ ईसाई समुदाय के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच भी काफी पूजनीय है।
भारत के कुछ खास चर्च में जब किसी की मुरादें पूरी होती हैं, तो ईश्वर के प्रति कृतज्ञता जाहिर करने के लिए आम चढ़ावे से अलग कुछ बेहद ही खास और अनोखी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। आइए जानते हैं भारत के उन प्रमुख चर्चों के बारे में जहां आज भी ये जीवंत परंपराएं देखने को मिलती है।

माउंट मैरी चर्च
मुंबई के बांद्रा में स्थित है जिसे माउंट मैरी चर्च, जिसे 'बेसिलिका ऑफ अवर लेडी ऑफ द माउंट' के नाम से भी जाना जाता है। यह चर्च एक रोमन कैथोलिक चर्च है, जहां वर्जिन मैरी को समर्पित है। दुनियाभर से लोग इस चर्च को देखने के लिए आते हैं। माना जाता है कि, इस चर्च में अद्भुत उपचार शक्तियां हैं जो मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
इस चर्च के बाहर एक बाजार भी लगता है, जहां शरीर के विभिन्न अंगों के मोम के पुतले बेचे जाते हैं। बीमार अंगों वाले श्रद्धालु अपने हिसाब से पुतला खरीदते हैं और इस विश्वास और श्रद्धा के साथ जलाते हैं कि, इससे संबंधित बीमारी ठीक हो जाएगी।

सेंट थॉमस चर्च
केरल के एर्नाकुलम जिले में मलयट्टूर पहाड़ियों पर स्थित है सेंट थॉमस चर्च, जो कि एक कैथोलिक चर्च है। यह चर्च केरल के सबसे जरूरी ईसाई तीर्थ स्थलों में शामिल है। माना जाता है कि, इस चर्च की स्थापना यीशु मसीहा के शिष्यों में से एक सेंट थॉमस ने 52 ईस्वी में की थी।
ईसाई उपवास और पवित्र सप्ताह के दौरान बड़ी ही संख्या में तीर्थयात्री कुरुसुमुदी पर्वत पर चढ़ते हैं, जो करीब 3 किलोमीटर की लंबी चढ़ाई यात्रा है। इसे पूरा करने में करीब 1 से 1.5 घंटा लगता है।
कई तीर्थयात्री अपने मन्नतें पूरी करने और पवित्र आशीर्वाद पाने के लिए इस चर्च में आते है। जहां तीर्थयात्री पहाड़ी की तलहटी से यात्रा शुरू करते हैं और लड़की का भारी क्रॉस, पत्थर या झाड़ू लेकर चलते हैं। यह जीवन के बोझ का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान तीर्थ यात्री 14 स्थानों पर रुककर आराम करते हैं, जिन्हें 'क्रॉस स्टेशन' के नाम से जाना जाता है।

वेलंकन्नी चर्च
तमिलनाडु में स्थित है वेलंकन्नी चर्च, जिसे 1. बेसिलिका ऑफ आवर लेडी ऑफ गुड हेल्थ के नाम से भी जाना जाता है। इस चर्च की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि, यदि कोई भक्त किसी भी बीमारी से ठीक होने की यहां मन्नत मांगता है, तो मन्नत पूरी होने के बाद वह उस अंग के आकार की सोने या चांदी से बनी छोटी चीजें माता मरियम को भेंट करता है। इसके अलावा चर्च के प्रांगण की मिट्टी और पास के कुंए दोनों में चमत्कारी उपचार की क्षमता की बात कही जाती है।
यह भी पढ़ें- भारत के 5 पवित्र धार्मिक स्थल, जहां हर धर्म के लोग टेकते हैं मत्था
यह भी पढ़ें- ज्वाला देवी मंदिर के रहस्य: बिना तेल-बाती जलती हैं 9 ज्योतियां, अकबर का अहंकार भी हुआ था चूर
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
