अहिरावण ने क्यों किया था श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण? पढ़ें पाताल लोक से जुड़ा गहरा रहस्य
रावण के कहने पर अहिरावण ने श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया था। वह अपनी कुलदेवी को उनकी बलि देना चाहता था, लेकिन हनुमान जी ने अहिरावण क ...और पढ़ें

लंका युद्ध का सबसे रहस्यमयी प्रसंग (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म का धार्मिक ग्रंथ रामायण को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसमें कई खास प्रसंग देखने को मिलते हैं। रामायण में एक भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और अहिरावण का प्रसंग आता है, जिसमें अहिरावण के द्वारा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का अपरहण कर लिया जाता है, लेकिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर श्रीराम और लक्ष्मण को सुरक्षित वापस ले आए।
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अहिरावण ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण क्यों किया। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से बताते हैं इस प्रसंग के बारे में।
राम-लक्ष्मण को पाताल लोक क्यों ले गया था अहिरावण?
पौराणिक कथा के अनुसार, लंका युद्ध के दौरान जब रावण का बेटा मेघनाद मारा गया, तो रावण को अहसास हुआ कि उसकी हार निश्चित है, तो इस स्थिति में लंकापति रावण ने पाताल लोक के राजा अहिरावण को मदद के लिए बुलाया। लंकापति रावण ने अहिरावण को भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का अपरहण करने का वचन दिया। वहीं, विभीषण को इस बात का आभास हो गया था कि अहिरावण कोई बड़ी चाल चल सकता है, तो ऐसे में विभीषण ने राम-लक्ष्मण के शिविर के बाहर चारों तरफ एक सुरक्षा का घेरा बना दिया।
भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की बलि देना था चाहता था अहिरावण
अहिरावण ने प्रभु का अपरहण करने के लिए कई तरह के प्रयास किए, लेकिन उसे सफलता प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद अहिरावण ने विभीषण का रूप धारण किया और सोते हुए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया। अपहरण करने का प्रमुख उद्देश्य था कि अपनी कुलदेवी के सामने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की बलि देना था, जिससे देवी प्रसन्न होंगी और रावण की विजय सुनिश्चित हो जाएगी।
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हनुमान जी ने किया अहिरावण का अंत
अपहरण का पता जब हनुमान जी को लगा, तो वे पाताल लोक पहुंचे। वहां पर उन्होंने अपना पंचमुखी रूप धारण किया, क्योंकि अहिरावण को एक वरदान प्राप्त था कि जो 5 दिशाओं में रखे दीपकों को एक साथ बुझाएगा। वही उसका वध कर सकेगा। हनुमान जी ने उन 5 दीपकों को एक साथ बुझाया। इसके बाद अहिरावण का वध किया और पाताल लोक से भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को सुरक्षित वापस ले आए। अहिरावण के द्वारा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण करने का वर्णन कृत्तिवास रामायण के युद्ध कांड में देखने को मिलता है।
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