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24 या 25 सितंबर, कब है अनंत चतुर्दशी? नोट करें सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और अनंत सूत्र बांधने का महत्व

Published: Sun, 20 Sep 2026 01:38 PM (IST)Updated: Sun, 20 Sep 2026 03:05 PM (IST)

सनातन धर्म में अनंत चतुर्दशी को विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। आइए आपको बताते हैं इस साल कब ...और पढ़ें

अनंत चतुर्दशी 2026: सही तारीख और अनंत सूत्र बांधने का विशेष महत्व (Picture Credit: AI Generated)

अनंत चतुर्दशी 2026: सही तारीख और अनंत सूत्र बांधने का विशेष महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

  2. भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत सूत्र बांधें।

  3. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और राहु काल से बचें।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म की प्रमुख तिथियों में से एक है अनंत चतुर्दशी का व्रत। यह दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भक्त जन पूरी श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनसे घर की समृद्धि का आशीर्वाद लेते हैं।

यही नहीं इस दिन सबसे खास माना जाता है अनंत सूत्र बांधना। यह एक ऐसा धागा होता है जिसमें 14 गांठें लगाईं जाती हैं और पूजन के बाद इसे हाथ में बांधा जाता है। इसी दिन गणपति विसर्जन भी होता है।

इस वजह से लोग विष्णु जी के साथ गणपति की पूजा भी करते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी की तिथि को लेकर लोगों के मन में शंका है और यह पर्व किस दिन मनाया जाएगा, इसके बारे में सभी जानकारी लेना चाहते हैं। आवे आपको बताते हैं इसकी सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है?

अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?

  • इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
  • अनंत चतुर्दशी तिथि आरंभ- 24 सितंबर 2026 रात्रि 11:18 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त- 25 सितंबर, रात 11:06 बजे
  • ऐसे में उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 25 सितंबर को ही रखना फलदायी होगा।

अनंत चतुर्दशी पूजा का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा के कुछ विशेष शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। अगर आप इन्हीं मुहूर्त में पूजा करेंगे, तो आपको शुभ फल मिलेंगे।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय- 25 सितंबर प्रातः 06:10 और शाम 06:14
ब्रह्म मुहूर्त प्रात-04:35 से प्रातः 05:23 तक
अभिजीत मुहूर्त- प्रातः 11:50 से दोपहर 12:38 तक
राहु काल-प्रातः 10:43 से दोपहर 12:14 तक (आपको राहु काल में कोई भी पूजन नहीं करना चाहिए, इसलिए इस समय न करें तो बेहतर होगा। )

अनंत चतुर्दशी का महत्व

वैसे तो विष्णु जी एक कई रूप और अवतार हैं, लेकिन अनंत चतुर्दशी के दिन उनके अनंत रूप का पूजन किया जाता है। अनंत भगवान विष्णु का एक नाम और स्वरूप है। भगवान विष्णु अनंत रूप में शेषनाग पर विराजमान हैं। वो शेषनाग की शैय्या पर ही शयन करते हैं, इसलिए भगवान विष्णु का को अनंत नाम से भी पुकारा जाता है।

भगवान श्री हरि विष्णु का नारद पुराण में सबसे अच्छा उल्लेख मिलता है और बताया गया है कि भादो महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। यही नहीं इस दिन अनंत सूत्र बांधने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि अनंत धागा हाथ में बांधने से आपके जीवन में समृध्दि बनी रहती है।

अनंत सूत्र बांधने का महत्व

अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत सूत्र में 14 गांठे लगाकर बांधा जाता है। इसे 14 लोक माना जाता है। 14 लोकों में भगवान विष्णु ही विराजमान हैं। इसलिए 14 गांठों वाला अनंत धागा बांधना विष्णु जी की भक्ति का प्रतीक होता है।

इस धागे को पहले हल्दी से रंगा जाता है, जो शुभता का प्रतीक है। जो व्यक्ति इसे हाथ में बांधता है उसके ऊपर विष्णु जी की कृपा बनी रहती है।

धागे को पूजन के बाद 14 गांठ लगाकर भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है, उसके बाद ही इसे हाथ में पहना जाता है। महिलाएं इसे बाईं भुजा में पहनती हैं और पुरुष इसे दाहिने हाथ में धरा करते हैं।

अनंत चतुर्दशी के दिन विष्णु जी के अनंत स्वरूप की पूजा करनी चाहिए जिससे जीवन में समृद्धि बनी रहती है।

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