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रात में शंख बजाना शुभ है या अशुभ, किस समय भूलकर भी नहीं करना चाहिए शंखनाद?

Updated: Tue, 01 Sep 2026 08:19 AM (GMT+05:30)

पूजा-पाठ में शंख बजाना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन इसके लिए सही समय का ज्ञान आवश्यक है। ज्योतिष के ...और पढ़ें

रात में शंख बजाना शुभ या अशुभ जानें सही समय और नियम (Picture Credit: AI Generated)

रात में शंख बजाना शुभ या अशुभ जानें सही समय और नियम (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. सूर्यास्त के बाद शंख बजाना अशुभ माना जाता है।

  2. रात्रि में देवता विश्राम करते हैं, शंखनाद से बाधा।

  3. सुबह का समय शंख बजाने के लिए सबसे शुभ होता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। किसी भी पूजा-पाठ में शंख बजाने को अत्यंत शुभ माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि शंख की ध्वनि में बहुत ज्यादा शक्ति और आध्यात्मिक रहस्य छिपा होता है।

यह सिर्फ पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली एक साधारण सी चीज नहीं है बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा, दैवीय स्पंदन और सकारात्मकता का प्रतीक भी है जो आपको सीधे ब्रह्मांड से जोड़ता है।

अपनी रोजाना की पूजा से लेकर पवित्र वैदिक अनुष्ठानों तक, शंख बजाने के कई आध्यात्मिक लाभ हैं। यह आपके आस-पास के वातावरण को तो पवित्र बनाता ही है और इससे निकलने वाली ऊर्जा खुशहाली का प्रतीक भी होती है।

कई बार शंख बजाने को लेकर एक बड़ा सवाल यह आता है कि क्या रात के समय या सूर्यास्त के बाद शंखनाद करना ठीक है? आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी श्री आनंद सागर पाठक से जानते हैं कि हिंदू वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार शंख बजाने का सही समय क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है।

शंख की पवित्र ध्वनि का महत्व क्या है?

शंख बजाना सिर्फ एक प्रतीकात्मक काम नहीं माना जाता है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया भी है जिससे एक खास ध्वनि निकलती है जो सीधे ब्रह्मांड की ऊर्जा से जुड़ती है। यह ध्वनि ब्रह्मांडीय ध्वनि 'ॐ' जैसी ही होती है, जो ब्रह्मांड में उत्पन्न होने वाली मूल ध्वनि का ही रूप है।

ऐसा माना जाता है कि 'ॐ' में आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा और स्पंदन को दूर करने की शक्ति होती है और यह घर के लोगों को किसी भी बुरी ताकतों के असर से बचाता है। शंख बजाने के कई लाभ हैं और इसे मुख्य रूप से सुबह की पूजा-पाठ, किसी नए काम की शुरुआत या कई हिंदू समारोहों के शुभ समापन का एक अहम हिस्सा माना जाता है।

किस समय शंख नहीं बजाना चाहिए?

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, शंख बजाने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं और अनुचित समय पर शंखनाद करना सही नहीं माना जाता है। इसमें शंख बजाने के कुछ अनुचित समय हैं। आइए जानें उनके बारे में-

रात्रि का समय

अगर हम ज्योतिष की मानें तो सूर्यास्त के बाद और रात के समय शंखनाद करना शुभ नहीं माना जाता है। वैदिक मान्यताओं और हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, शाम की पूजा या सूर्यास्त के बाद शंख बजाने से आपको बचना चाहिए। इसका एक कारण यह है कि आमतौर पर यह माना जाता है कि सूर्यास्त और शाम के समय, आध्यात्मिक और ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं सुस्त या तामसिक हो जाती हैं। इसलिए, शाम की आरती या पूजा के दौरान शंख बजाने से इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।

रात का समय देवताओं के विश्राम का होता है

ज्योतिष में ऐसा माना जाता है कि शाम की आरती के बाद देवता विश्राम करते हैं। शंख बजाने पर निकलने वाली 'ओम' जैसी उच्च-ऊर्जा वाली ध्वनि, गलत देवताओं के विश्राम के समय में बाधा ला सकती है। इसलिए इस समय शंख न बजाने की सलाह दी जाती है। यही नहीं मान्यता यह भी है कि रात्रि में शंख बजाने से देवताओं की निद्रा भंग होती है।

इस समय भी न करें शंखनाद

सूर्यास्त के बाद शंख न बजाने की सलाह दी जाती है और इसके अलावा भी आपको ग्रहण काल और सूतक के समय भी शंख नहीं बजाना चाहिए। इससे भी शंख की ध्वनि के नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।

शंख बजाने का सबसे शुभ समय क्या है?

अगर हम शंख बजाने के सबसे शुभ समय की बात करें तो, शंख बजाने का सही समय सुबह का माना जाता है। शंख से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा सूर्य की उपस्थिति में ही सबसे ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। इसी वजह से सुबह की पूजा के समय शंख बजाना सबसे ज्यादा शुभ होता है और ये आस-पास के वातावरण को भी शुद्ध करता है।

अगर आप भी घर में शंख रखते हैं और इसे नियमित रूप से बजाते हैं, तो इसके सही समय की जानकारी होनी जरूरी है, जिससे इसके पूर्ण लाभ मिलें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।