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    Chaitra Navratri 2026 Day 5: इस कथा के पाठ से भर जाएगी खुशियों से झोली, स्कंदमाता खोलेंगी बंद किस्मत के ताले

    Updated: Sun, 22 Mar 2026 07:30 PM (IST)

    चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इनकी आराधना से निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख मिल ...और पढ़ें

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    मां स्कंदमाता की कथा (AI Generated Image) 

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में नवरात्र की अवधि का एक विशेष महत्व माना गया है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना करने का विधान है। चैत्र नवरात्र की पावन अवधि चल रही है। 23 मार्च को चैत्र नवरात्र का पाचंवा (Chaitra Navratri 2026 Day 5) दिन है। इस दिन देवी स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने का विधान है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी स्कंदमाता की पूजा करने से निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख मिलता है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि में वृद्धि होती है। अगर आप भी देवी स्कंदमाता की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो देवी स्कंदमाता की पूजा के दौरान कथा का पाठ जरूर करें। इससे आपको पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

    मां स्कंदमाता की कथा (Maa Skandamata Katha Hindi)

    पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नाम के असुर ने कठिन तपस्या की थी। उसकी तपस्या से ब्रह्माजी ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि उसकी मृत्यु सिर्फ महादेव के पुत्र के हाथों ही संभव हो। उस दौरान महादेव ध्यान में थे और सती का दूसरा जन्म अभी नहीं हुआ था। तब असुर को लगा कि महादेव कभी विवाह नहीं करेंगे, तो उनका पुत्र नहीं होगा और वह अमर हो जाएगा।

    इसके बाद तारकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर ने देवताओं ने शिव जी को ध्यान से जगाने का प्रयास किया। उस दौरान सती ने देवी हिमालय की बेटी पार्वती' के रूप में जन्म लिया। मां पार्वती ने महादेव को पाने के लिए तपस्या की। जब देवताओं और माता पार्वती के प्रयासों से महादेव का ध्यान टूटा, तो उसके बाद शिव जी ने मां पार्वती से विवाह किया। इसके बाद तेज प्रकट हुआ और स्वयं अग्नि देव ने धारण किया। इस तेज को देवी गंगा के सुपुर्द किया गया। जिन्होंने सरवन वन में छोड़ दिया। जहां कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म हुआ।

    इसके बाद मां पार्वती ने स्वयं स्कंद भगवान को युद्ध की शिक्षा दी। देवी ने सिंह पर उन्हें युद्धभूमि में भेजा। उन्होंने शक्ति से तारकासुर का संहार किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंदमाता की सच्चे मन से साधना करने से संतान से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति मिलती है और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

    मां स्कंदमाता के मंत्र

    वंदे वांछित कामार्थे चंद्रार्धकृतशेखराम्।

    सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कंदमाता यशस्वनीम्।।

    धवलवर्णा विशुद्ध चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।

    अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥

    पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।

    मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥

    प्रफु्रल्ल वंदना पल्लवांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।

    कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

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