धनतेरस पर 13 दीये जलाने की प्रथा क्या है? यम से लेकर कुबेर तक, घर के इन स्थानों पर दीपक रखना होता है शुभ
धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसका उद्देश्य अकाल मृत्यु से रक्षा और घर-परिवार की अच्छी ...और पढ़ें

धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की प्रथा क्या है (Picture Credit: AI Generated)
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धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा 'यम दीपम' से जुड़ी है।
अकाल मृत्यु से रक्षा और अच्छी सेहत के लिए जलाए जाते हैं दीपक।
घर के विभिन्न स्थानों पर दीपक रखने का विशेष महत्व होता है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। धनतेरस पर 13 दीये जलाना 'यम दीपम' की परंपरा से जुड़ा है। इस त्योहार की सबसे पुरानी प्रथाओं में से एक है इस दिन दीपदान करना। इन सभी दीयों का उद्देश्य अकाल मृत्यु से रक्षा और भविष्य के लिए घर-परिवार के लोगों की अच्छी सेहत की कामना करना होता है।
इन 13 दीयों के पीछे एक विशेष आध्यात्मिक उद्देश्य भी होता है और हर दीया सुरक्षा का प्रतीक होता है। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, धनतेरस दिवाली से दो दिन पहले, कार्तिक महीने में आता है। यह पर्व आयुर्वेद और आरोग्य के देवता 'धन्वंतरि' के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
धन्वंतरि का प्राकट्य समुद्र मंथन से हुआ था और वो इसी दिन अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन 13 दीपक जलाने का एक मुख्य उद्देश्य घर के हर कोने को प्रकाशित करना है और इस दिन त्रयोदशी तिथि भी होती है, इसलिए 13 की संख्या में दीपक जलाए जाते हैं। आइए आपको बताते हैं किन स्थानों पर दीपक रखना सबसे शुभ होता है और इनका महत्व क्या है?
धनतेरस पर 13 दीप जलाने का महत्व
धनतेरस पर 13 की संख्या का विशेष महत्व होता है। पारंपरिक वर्ष के 13 चंद्र महीनों में से हर एक महीने के लिए एक दीपक जलाया जाता है और ऐसी मान्यता है कि एक साथ 13 दीये जलाने से आने वाले सभी महीनों में घर-परिवार की सुरक्षा होती है। इन 13 दीयों को शरीर के 13 मुख्य प्राणों से भी जोड़ा जाता है।
इन 13 दीयों के बीच में एक मुख्य दीया होता है, जिसे 'यम दीपम' या यम का दीया कहा जाता है। इसे मृत्यु के देवता यम को प्रसन्न करने के लिए जलाया जाता है, जिससे घर के लोगों में अकाल मृत्यु का भी न रहे।
धनतरेस पर किन स्थानों पर जलाएं दीपक
- धनतेरस के दिन आपको पहला दीपक घर की दक्षिण दिशा में यम देव के लिए जलाना चाहिए।
- दूसरा दीपक आपको घर के बाहर कूड़ा रखने के स्थान पर दीपक जलाते हैं, तो अकाल मृत्यु का भय कम होता है।
- तीसरा दीपक आपको मुख्य द्वार पर जलाना चाहिए, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
- चौथा दीपक आपको तुलसी के पास जलाना चाहिए, इससे घर में माता लक्ष्मी का वास होता है।
- पांचवां दीपक आपको घर की छत में जलाना चाहिए, जिससे राहु के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
- छठा दीपक आपको घर के पूजा एक स्थान पर जलाना चाहिए जिससे माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर जी की कृपा भी बनी रहती है।
- सातवां दीपक आप घर के पास लगे हुए पीपल के वृक्ष के पास जलाएं, इससे पूर्वजों की कृपा बनी रहती है।
- आठवां दीपक आपको घर के स्टोर वाले स्थान पर जलाना चाहिए इससे घर का दारिद्रय दूर होता है और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
- नौवां दीपक घर के वॉशरूम के बाहर रखें जिससे घर में किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को कम किया जा सके।
- दसवां दीपक आपको घर की खिड़कियों के पास जलाना चाहिए जिससे रोशनी पूरे घर में फ़ैल सके।
- ग्यारहवां दीया बेल के पेड़ के नीचे जलाना चाहिए जिससे भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।
- बारहवां दीया आपको घर के केंद्र यानी ब्रह्मस्थान में जलाना चाहिए, जिससे घर के लोगों के बीच सामंजस्य बना रहता है।
- तेरहवां दीपक आपको घर के ईशान कोण पर जलाना चाहिए, जिससे सभी देवों का आशीर्वाद बना रहे।
अगर आप भी धनतेरस के दिन 13 दीपक घर के अलग-अलग स्थानों पर रखते हैं, तो यह अत्यंत शुभ होता है और इससे घर की समृद्धि भी बनी रहती है।
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