Ganesh Visarjan 2026 Niyam:क्या सबको करना चाहिए विघ्नहर्ता का विसर्जन, पढ़ लें ये जरूरी नियम
श्री गणेश जी की घर में स्थापना और उनका विसर्जन करना क्या हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है और बप्पा ...और पढ़ें

गणेश विसर्जन नियम। (Picture Credit- AI Generated)निय
HighLights
सूतक या अशौच की स्थिति में नई गणेश प्रतिमा स्थापित न करें।
मिट्टी की गणेश प्रतिमा का विसर्जन करें, धातु की नहीं।
अकाल मृत्यु दोष वाले व्यक्ति गणपति विसर्जन से बचें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गणेश उत्सव चल रहा है, घर-घर में इन दिनों भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करने की परंपरा है। भक्त कई दिनों तक विधि-विधान से पूजा, आरती और भोग लगाकर बप्पा की सेवा करते हैं। इसके बाद शुभ मुहूर्त में गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। लेकिन क्या हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना जरूरी है? इस सवाल को लेकर कई लोगों के मन में असमंजस रहता है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिष श्री चंद्रेश शर्मा के अनुसार, गणेश स्थापना और विसर्जन से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए। चलिए इन जरूरी नियमों के बारे में आपको भी बताते हैं।
सूतक या अशौच की स्थिति
यदि परिवार में जन्म या मृत्यु के कारण सूतक अथवा अशौच की स्थिति चल रही हो, तो नई गणेश प्रतिमा की स्थापना नहीं करनी चाहिए और यदि कर ली है, तो उसका विर्सजन नहीं करना चाहिए।
पूजा के नियम निभाना संभव न हो
गणपति स्थापना केवल प्रतिमा रखने तक सीमित नहीं होता है, इसके कुछ जरूरी नियम होते हैं। स्थापना के बाद नियमित पूजा, आरती, भोग और स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। कई बार ऐसा हम नहीं कर पाते हैं, क्योंकि हमारे पास समय की कमी होती है। इसलिए जिन लोगों के लिए स्थापित प्रतिमा की नियमित सेवा करना संभव न हो, वे अस्थायी गणेश स्थापना करने से पहले अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा पर विचार कर सकते हैं।
क्या हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन होता है?
गणेश प्रतिमा के विसर्जन का नियम प्रतिमा के प्रकार और उसकी स्थापना के उद्देश्य पर निर्भर करता है।
मिट्टी की गणेश प्रतिमा
गणेश चतुर्थी के लिए विशेष रूप से स्थापित मिट्टी की प्रतिमा का निर्धारित पूजा अवधि के बाद विसर्जन कर देना चाहिए है। इसका भाव यह है कि जिस प्रतिमा में भक्त ने श्रद्धापूर्वक पूजा की, वह अंत में प्रकृति में वापस विलीन हो जाती है।
धातु या स्फटिक की स्थायी मूर्ति
घर के मंदिर में रखी सोने, चांदी, पीतल या अन्य धातु की स्थायी गणेश मूर्ति का सामान्यतः विसर्जन नहीं किया जाता। इसी तरह स्फटिक की स्थायी मूर्ति को भी पूजा स्थान पर रखकर नियमित पूजा करने की परंपरा है।
जिन पर हो अकाल मृत्यु का दोष
श्री गणेश को विघ्न हरता कहा जाता है। जिन लोगों पर अकाल मृत्यु का दोष बन रहा होता है, उन्हें कभी भी गणपति विसर्जन नहीं करना चाहिए। हां, वे लोग घर में गणपति की स्थापना कर सकते हैं या पहले से स्थापित श्री गणेश की पूजा कर सकते हैं। मगर उन्हें विर्सजित नहीं करना चाहिए।
विसर्जन से पहले रखें इन बातों का ध्यान
विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें, आरती करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। इसके बाद परिवार के सदस्य गणपति से सुख-समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करते हुए विसर्जन करें।
बप्पा को विदा करने का भाव
गणेश विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूजा के समापन और भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इसलिए नियमों के साथ-साथ भक्ति, स्वच्छता और पर्यावरण की जिम्मेदारी का भी ध्यान रखना चाहिए।
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