Geeta Jayanti 2025: पूर्ण लाभ के लिए जरूर ध्यान रखें गीता पाठ से जुड़े जरूरी नियम
गीता जयंती हर साल मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस बार यह पर्व 1 दिसंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पूर्ण लाभ के लिए गीता पाठ के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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Geeta Jayanti 2025 (AI Generated Image)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती (Geeta Jayanti 2025) का पर्व मनाया जाता है। भगवत गीता, हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जिसके पाठ से जीवन में सकात्मक बदलाव आ सकते हैं। गीता पाठ करते समय अगर आप कुछ नियमों का ध्यान रखते हैं, तो इससे आपको पाठ का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सकता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।
सबसे पहले करें ये काम
श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करते समय स्वच्छता और पवित्रता का पूरा ध्यान रखना चाहिए। सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इसके बाद एक एक स्थान पर आसन बिछाकर बैठ जाएं और भगवान का ध्यान करते हुए श्रीमद्भागवत गीता का पाठ शुरू करें।

(Picture Credit: Freepik)
रखें इन बातों का ध्यान
गीता पाठ के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि वह जगह शांतिपूर्ण और स्वच्छ होनी चाहिए। इससे आप एकाग्रता के साथ पाठ कर पाएंगे। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका ध्यान इधर-उधर न भटके और न ही किसी से बातचीत करें। आपने जो अध्याय शुरू किया है, उसे पूरा करने के बाद ही उठें।
इन गलतियों को करने से बचें
गीता को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए और न ही इसे हाथ में रखकर पाठ नहीं करना चाहिए। इसे हमेशा लकड़ी के आसन या चौकी पर रखें। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि गीता को कभी भी गंदे हाथों से छूना चाहिए। गीता पाठ के दौरान आपके मन में किसी तरह का नकारात्मक विचार न लाएं। इन कार्यों से आपको गीता पाठ का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

तभी मिलेगा पूरा लाभ
गीता के उपदेशों के केवल पाठ से लाभ नहीं मिलता, बल्कि इन्हें समझना और अपने जीवन में अपनाना भी जरूरी है। क्योंकि श्रीमद्भागवत गीता में भी कर्म को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ऐसे में व्यक्ति को गीता पाठ का पूरा लाभ तब मिलता है, जब इसे पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता से पढ़ा जाए, न कि केवल बौद्धिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए।
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