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गोगा नवमी 2026: जानिए शुभ तिथि, पूजा विधि और नागों के रक्षक 'जहरवीर गोगाजी' की पावन कथा

Published: Sat, 05 Sep 2026 10:08 AM (IST)

भाद्रपद मास में मनाई जाने वाली गोगा नवमी 2026 में 5 सितंबर को है। यह पर्व योद्धा-संत गोगाजी को समर्पित ...और पढ़ें

गोगा नवमी 2026 तिथि (Picture Credits- AI Images)

गोगा नवमी 2026 तिथि (Picture Credits- AI Images)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद मास की शुरुआत के साथ ही राजस्थान के गांवों में एक खास सन्नाटा छा जाता है। खेत हरे-भरे हो जाते हैं, कुएं पानी से भर जाते हैं और इसके साथ ही एक पुरानी जानी-पहचानी चिंता लौट आती है जिसने पीढ़ियों से ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया वो है सांप है।

साल के इसी समय में जब बारिश राहत और जोखिम दोनों लेकर आती है तब राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के समुदायों में गोगाजी की तरफ सबका ध्यान जाता है।

कई लोग गोगा जी को जहरवीर गोगाजी या जहर वीर के नाम से जाने जाने वाले गोगाजी को असाधारण साहस वाले योद्धा-संत के रूप में याद करते हैं और लोक कथाओं में उन्हें सांप के काटने और जहर से रक्षक माना जाता है। गोगा नवमी 2026 मानसून के आखिर में पड़ रही है और परंपरा का पालन करने वालों के लिए यह सिर्फ एक तिथि नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही है रीति-रिवाजों का हिस्सा है।

गोगा नवमी 2026 तिथि

गोगा नवमी 2026- शनिवार 5 सितंबर 2026
नवमी तिथि का प्रारंभ- 5 सितंबर 2026 को रात 12:13 बजे
नवमी तिथि समाप्त- 5 सितंबर, 2026 को रात 9 बजकर 53 मिनट तक

गोगा नवमी भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को पड़ती है। भक्त आमतौर पर इस दिन गोगा जी की पूजा करते हैं और घर प बने पूजा स्थलों पर प्रार्थना करते हैं। इसके साथ ही उनके आशीर्वाद और आने वाले साल के लिए सुरक्षा हासिल करने के लिए गोगा थान (उनसे जुड़ा मंदिर) की यात्रा करते हैं।

गोगा नवमी 2026

गोग जी कौन हैं?

गोगा जी का जन्म चौहान राजपूत परिवार में हुआ था और वे एक ऐसे योद्धा के रूप में बड़े हुए जिनकी वीरता पीढ़ियों तक घुमंतू गायकों ने अमर बनाई रखी। गोग जी का सांपों से गहरा नाता था। परंपरा के मुताबिक, उनमें सांपों से बात करने और उन्हें आदेश देने की शक्ति हासिल थी।

यह संबंध उनकी पहचान का इतना अहम हिस्सा बन गया कि, समय के साथ उनकी पूजा मुख्य रूप से सांप के काटने से रक्षक के रूप में की जाने लगी। उन्हें जाहिर पीर भी कहा जाता है, जिसका मतलब 'प्रकट संत' जो यह दर्शाता है कि उनके अनुयायी काफी पहले ही धार्मिक सीमाओं को पार कर चुके हैं।

गोगा नवमी पूजा विधि

गोगा नवमी के मौके पर अधिकतर घरों में सबसे पहले घरों की साफ-सफाई की जाती है और पूजा के लिए साधारण स्थान तैयार किया जाता है। इसके बाद कई लोग गोगा थान या गोगाजी से जुड़े स्थानीय मंदिरों में जाते हैं और दूध, खीर, चूरमा, फल, फूल और अगरबत्ती जैसी चीजें भेंट करते हैं। वे खुद गोगा जी से प्रार्थना करते हैं और कई स्थानों पर उनसे जुड़े नाग देवता की भी पूजा की जाती है।

गोगा जी का पवित्र स्थान

भारत में एक ऐसी भी जगह है जो गोगा नवमी की भावना को बखूबी से दर्शाती है, तो वह राजस्थान का गोगामेडी है। किंवदंती के मुताबिक, यहीं पर गोगा जी ने समाधि ली थी और तब से यह स्थान उनसे जुड़ा सबसे खास तीर्थ स्थल बन गया है।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।