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    क्या आप जानते हैं कन्यादान जितना पुण्य देता है यह एक व्रत? देखें 10 महाव्रतों की लिस्ट

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 05:00 PM (IST)

    हिंदू धर्म में व्रतों का विशेष महत्व है, जो मन, वचन और कर्म की शुद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। जानिए एकादशी, प्रदोष, महाशिवरात्रि सहित 10 प्रमुख व्रतो ...और पढ़ें

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    हिंदू धर्म से जुड़े 10 प्रमुख व्रत (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में व्रतों का खास महत्व बताया गया है। उपवास को सिर्फ भोजन का त्याग ही नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, सही नियम और श्रद्धा के साथ व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति का संचार बना रहता है।

    हिंदू धर्म शास्त्रों में कई व्रत ऐसे भी बताए गए हैं, जिन्हें अनजानें में हुए पापों का पश्चाताप, ग्रह दोषों की शांति और आत्मशुद्धि के लिए काफी प्रभावशाली माना गया है। आइए जानते हैं 10 प्रमुख व्रतों के बारे में जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व काफी अधिक माना जाता है।

    एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat)

    एकादशी का व्रत सभी व्रतों में अत्यंत पवित्र और श्रेष्ठ माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और प्रत्येक महीने में 2 बार आता है। मान्यताओं के मुताबिक, सभी एकादशी व्रतों को विधिपूर्वक करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है।

    प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat)

    प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित सबसे खास व्रतों में से एक माना जाता है। हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने से मानसिक क्लेश, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त होती है।

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    महाशिवरात्रि (Mahashivratri)

    भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि भी अत्यंत पवित्र और शिव कृपा प्राप्त करने वाला खास व्रत माना गया है। शिव पुराण के अनुसार, इस दिन निष्काम भाव से रखा गया उपवास पापों से मुक्ति दिलाता है।

    सत्यनारायण व्रत (Satyanarayan Vrat)

    पूर्णिमा के मौके पर भगवान सत्यनारायण की कथा और व्रत रखने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अलावा यह व्रत अधर्म, असत्य और नकारात्मक कर्मों से उतपन्न होने वाले दोषों को कम करने में सहायक है।

    चातुर्मास व्रत (Chaturmas Vrat)

    आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक के चार महीने को चातुर्मास कहते हैं। चातुर्मास के दौरान संयम, साधना और त्याग द्वारा आत्मा की शुद्धि के लिए व्रत किया जाता है।

    वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi)

    वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को ही वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत का फल कन्यादान के फल के समान होता है, जो सौभाग्य प्रदान करने वाला व्रत माना जाता है।

    प्रमुख हिंदू व्रत

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    अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi)

    भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा को समर्पित यह दिन हिंदू शास्त्रों में काफी पवित्र माना जाता है। माना जाता है कि, इस व्रत को करने से पिछले जन्म के कर्म बंधनों से मुक्ति मिलती है।

    पापमोचिनी एकादशी (Papmochini Ekadashi)

    पापमोचिनी एकादशी जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है, पापों को मोचने यानी नष्ट करने वाली एकादशी जो खासतौर से जाने-अनजाने में की गई गलतियों के पश्चाताप के लिए रखा जाता है।

    सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya)

    जब अमावस्या की तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के साथ पूजा, दान और सेवा करने से पितृ दोष से राहत मिलती है।

    छठ व्रत (Chhath Vrat)

    छठ व्रत सबसे कठिन व्रतों में शामिल है। इस दिन सूर्य देव और छठी मैय्या की पूजा की जाती है, जो न केवल शारीरिक शुद्धि करता है, बल्कि व्यक्ति के संकल्प और व्यक्तित्व को भी मजबूत बनाता है।

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    अस्वीकरण: ''इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है''।