नाक में नथ पहनने से पीरियड्स के दर्द में भी मिलती है राहत! क्या कहती हैं ज्योतिषाचार्य?
भारतीय परंपरा में महिलाओं का नथ पहनना केवल शृंगार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सौभाग्य का प्रतीक भी है। ज्योतिषाचार्य से जानें इसके अनगिनत फायदे।

नथ पहनने के फायदे (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में 'नथ' महिलाओं के शृंगार का एक बहुत ही खास और अहम हिस्सा है। तीज-त्योहार से लेकर घर में कोई विशेष पूजा-पाठ तक, महिलाओं का पारंपरिक रूप नथ के बिना हमेशा अधूरा सा लगता है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि नाक में नथ पहनने की यह परंपरा सदियों से क्यों चली आ रही है?
एस्ट्रोपत्री की जानी-मानी ज्योतिषी रजनी गुप्ता जी ने इस विषय पर बहुत ही विस्तार से जानकारी दी है। उनका कहना है कि हमारी परंपरा में महिलाओं का नाक छिदवाना और नथ पहनना बेहद शुभ माना गया है। यह केवल एक गहना नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक (स्वास्थ्य) दृष्टि से भी बहुत महत्व है।
सुहाग और सोलह शृंगार का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नथ को सुहाग की सबसे प्रमुख निशानियों में गिना जाता है। इसे महिलाओं के 'सोलह शृंगार' में एक बहुत ही पवित्र स्थान दिया गया है। उत्तर भारत की शादियों से लेकर दक्षिण भारत के रिवाजों तक, हर जगह नथ पहनने का नियम है। माना जाता है कि इसे धारण करके महिलाएं माता पार्वती और अन्य देवियों के प्रति अपना सम्मान और आस्था प्रकट करती हैं।
सेहत और एक्यूप्रेशर के अनोखे फायदे
अगर हम विज्ञान और आयुर्वेद की बात करें, तो नथ पहनने के पीछे बड़ी सॉलिड वजहें हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि महिलाएं अपनी नाक के बाएं हिस्से को ही छिदवाती हैं। आयुर्वेद और एक्यूप्रेशर के मुताबिक, नाक के इस बाएं हिस्से की नसों का सीधा कनेक्शन महिलाओं के अंदरूनी अंगों और प्रजनन प्रणाली (Reproductive system) से होता है।
बाएं हिस्से में छेद करवाने से वहां एक्यूप्रेशर पॉइंट दबता है, जिससे महिलाओं को मासिक धर्म यानी पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द और परेशानियों में काफी हद तक राहत मिलती है।
ग्रहों का शुभ प्रभाव
ज्योतिषी रजनी गुप्ता जी बताती हैं कि ज्योतिष शास्त्र में नथ का सीधा संबंध शुक्र (Venus) और चंद्रमा (Moon) ग्रह से माना गया है। शुक्र ग्रह जहां आकर्षण और वैवाहिक सुख का कारक है, वहीं चंद्रमा मन की शांति का प्रतीक है। नथ पहनने से ये दोनों ग्रह मजबूत होते हैं। इसका असर यह होता है कि महिलाओं का प्राकृतिक सौंदर्य निखरता है, उनका मानसिक संतुलन बेहतर रहता है और उनके जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
