काली चौदस की रात का रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान! यम दीपक से लेकर तंत्र-मंत्र तक जुड़ी हैं ये 5 मान्यताएं
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर 7 नवंबर को काली चौदस (Kali Chaudas 2026) मनाई जाएगी, जिसमें मां काली, हनुमान जी और ...और पढ़ें
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काली चौदस के 5 रहस्य (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर काली चौदस (Kali Chaudas 2026)मनाई जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह पर्व 7 नवंबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर मां काली, हनुमान जी और यमराज की पूजा-अर्चना का विधान है। काली चौदस पांच दिवसीय महापर्व का दूसरा दिन होता है।
इस पर्व से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आइए इस लेख में आपको काली चौदस से जुड़ी प्रमुख मान्यताओं के बारे में विस्तार से बताते हैं।
क्यों खास है काली चौदस का पर्व?
मां काली की पूजा और शक्ति का प्रतीक- काली चौदस के अवसर पर मां काली की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब दैत्य रक्तबीज और अन्य असुरों का अत्याचार तीनों लोकों में बहुत बढ़ गया था, तब उनके संहार के लिए मां काली प्रकट हुई थीं। मान्यता है कि मां काली की विधिवत पूजा करने से साधक को सभी प्रकार राक्षस नरकासुर का वधके मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
राक्षस नरकासुर का वध- पौराणिक कथा के अनुसार, इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध कर उसकी कैद से 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था। नरकासुर का वध करने के बाद श्रीकृष्ण ने अपने शरीर पर लगे रक्त को साफ करने के लिए तेल और उबटन लगाकर स्नान किया था। इसी कारण इस दिन अभ्यंग स्नान (उबटन और तेल लगाकर स्नान) करने की परंपरा है।
यम का दीपक- काली चौदस की शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करने की प्राचीन परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यम का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और परिवार के सदस्यों को दीर्घायु का वरदान मिलता है।
नकारात्मक शक्तियों व तंत्र-मंत्र से मुक्ति- काली चौदस की रात्रि को बुरी नज़र, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा पाने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। साधक इस रात विशेष अनुष्ठान और मंत्र जप करते हैं, जिससे घर-परिवार की सभी बाधाएँ दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हनुमान जी की पूजा- गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में इस दिन हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन बजरंगबली को सिंदूर, तेल और चोला अर्पित करने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन संकटमोचन की आराधना करने से जीवन के सभी भय, संकट और ग्रह दोष दूर हो जाते हैं।
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