Lakshmi Panchami 2026: इस दिन रखा जाएगा लक्ष्मी पंचमी का व्रत, जानें पूजा विधि, भोग, मंत्र से लेकर लेकर सारी डिटेल्स
लक्ष्मी पंचमी (Lakshmi Panchami 2026) चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है, जो 2026 में 23 मार्च को पड़ेगी। ...और पढ़ें

Lakshmi Panchami 2026: लक्ष्मी पंचमी पूजा विधि। (Ai Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Lakshmi Panchami 2026: चैत्र नवरात्र के दौरान आने वाला महापर्व लक्ष्मी पंचमी का दिन बेहद शुभ मान जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी मनाई जाती है। इस साल यह 23 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा के साथ ही लक्ष्मी पंचमी का बेहद शुभ संयोग बन रहा है।
माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी सबसे प्रसन्न मुद्रा में होती हैं। अगर आप कर्ज से परेशान हैं या मेहनत के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिकता, तो लक्ष्मी पंचमी का व्रत जरूर रखें। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

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लक्ष्मी पंचमी का महत्व (Lakshmi Panchami 2026 Significanec)
लक्ष्मी पंचमी का दिन हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व रखता है। लक्ष्मी पंचमी को 'श्री पंचमी' या 'कल्पदि पंचमी' भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही घर की दरिद्रता दूर होती है।
पूजा विधि (Lakshmi Panchami 2026 Puja Vidhi)
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और गुलाबी या सफेद रंग के साफ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
- अगर आपके पास 'श्री यंत्र' है, तो इस दिन उसकी भी विधिवत पूजा करें।
- मां लक्ष्मी को गंगाजल और दूध से अभिषेक कराएं।
- उन्हें कमल का फूल या लाल गुलाब अर्पित चढ़ाएं।
- गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उसमें एक लौंग डाल दें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- अंत में आरती करें।
- इसके बाद पूजा में सभी गलती के लिए माफी मांगे।
मां लक्ष्मी का प्रिय भोग (Lakshmi Panchami 2026 Bhog List)
मां लक्ष्मी को सफेद रंग की चीजें बहुत प्रिय हैं। ऐसे में उन्हें मखाने की खीर, बताशे या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। अगर हो पाए, तो भोग में 'कमल गट्टा' भी रखें।
पूजन मंत्र (Puja Mantra)
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥
- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
- ॐ पृथ्वी त्वया घृता लोका देवि त्वं विष्णुना घृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥
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