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रक्षाबंधन के 5 दिन बाद क्यों मनाई जाती है रक्षा पंचमी? इस दिन क्या करें और क्या नहीं

Updated: Tue, 01 Sep 2026 09:17 AM (IST)

आज 1 सितंबर को रक्षा पंचमी 2026 मनाई जा रही है। जानिए रक्षाबंधन के पांच दिन बाद मनाए जाने वाले ...और पढ़ें

रक्षा पंचमी पर करें ये काम (AI-Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प से जुड़ा हुआ है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि राखी के ठीक पांच दिन बाद भी एक खास पर्व मनाया जाता है, जिसे रक्षा पंचमी कहा जाता है? इस साल रक्षा पंचमी 1 सितंबर 2026 यानी आज मंगलवार को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप और विशेष रूप से बटुक भैरव की पूजा के लिए जरूरी माना जाता है।

रक्षाबंधन के 5 दिन बाद ही क्यों?

रक्षा पंचमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस वजह से इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है। इस साल कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 1 सितंबर की सुबह करीब 7:42 बजे से शुरू होकर 2 सितंबर की सुबह तक रहेगी। इसी कारण इस बार रक्षा पंचमी 1 सितंबर को मनाई जा रही है।

मान्यता है कि यह पर्व सुरक्षा और संकटों से बचाव की कामना से जुड़ा हुआ है। कुछ परंपराओं में इसे रेखा पंचमी या राख्य पंचमी भी कहा जाता है। खासतौर पर पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में इस दिन का विशेष महत्व है।

इस दिन क्या करें?

रक्षा पंचमी पर सुबह स्नान करके भगवान शिव, बटुक भैरव और गणेश जी की पूजा करने का विधान है। घर में सुख-शांति और परिवार की सुरक्षा की कामना से दीपक जलाया जा सकता है। श्रद्धा के अनुसार भगवान को फल, फूल और प्रसाद अर्पित करें।

अगर किसी वजह से रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी नहीं बांध पाई हैं, तो कुछ परंपराओं में रक्षा पंचमी के दिन भी राखी बांधने का अवसर माना गया है। हालांकि, यह प्रथा सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं है।

इस दिन क्या नहीं करना चाहिए?

आज के दिन किसी के साथ बेवजह विवाद या बहस वाला व्यवहार करने से पूरी तरह से बचें। पूजा-पाठ में मन लगाएं और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। साथ ही, स्थानीय परंपरा और अपने परिवार की मान्यताओं के अनुसार ही पूजा-विधि करें। रक्षा पंचमी और पंचक दो अलग-अलग चीजें हैं। इस साल पंचक 27 अगस्त दोपहर से 1 सितंबर की सुबह तक था, जबकि रक्षा पंचमी पंचमी तिथि पर 1 सितंबर को मनाई जा रही है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।