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    Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण के दौरान जपें ये शक्तिशाली मंत्र, बरसेगी लक्ष्मी नारायण जी की कृपा

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 02:09 AM (IST)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या पर साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा ...और पढ़ें

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    Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण का सही समय 

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या है। इस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण ( Surya Grahan 2026) लगेगा। हालांकि, यह भारत में नहीं दिखाई देगा। इसके लिए सूतक भी मान्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर लगता है। ग्रहण के समय राहु का प्रभाव पृथ्वी पर बढ़ जाता है। इसके लिए ग्रहण के दौरान शुभ काम नहीं किया जाता है।

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    ज्योतिष ग्रहण के दौरान हरि और शिव सुमिरन करने की सलाह देते हैं। इससे राहु का अशुभ प्रभाव व्यक्ति विशेष पर नहीं पड़ता है। अगर आप भी विष्णु जी की कृपा पाना चाहते हैं, तो सूर्य ग्रहण के समय इन मंत्रों का जप करें। इन मंत्रों के जप से राहु की कुदृष्टि जातक पर नहीं पड़ती है।

    विष्णु मंत्र

    ॐ नमोः नारायणाय॥

    2. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    3. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

    4. ध्याये न्नृसिंहं तरुणार्कनेत्रं सिताम्बुजातं ज्वलिताग्रिवक्त्रम्।
    अनादिमध्यान्तमजं पुराणं परात्परेशं जगतां निधानम्।।

    5. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
    विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।


    शिव मंत्र

    1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    2. करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं ।

    विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥

    3. ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

    4. ऊँ अघोरेभ्यो अथघोरेभ्यो, घोर घोर तरेभ्यः। सर्वेभ्यो सर्व शर्वेभ्यो, नमस्ते अस्तु रूद्ररूपेभ्यः।।

    5. नमामिशमीशान निर्वाण रूपं विभुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं।।

    सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली स्तोत्रम्

    सूर्योsर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि:।
    गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर:।।
    पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वयुश्च परायणम ।
    सोमो बृहस्पति: शुक्रो बुधोsड़्गारक एव च ।।
    इन्द्रो विश्वस्वान दीप्तांशु: शुचि: शौरि: शनैश्चर:।
    ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च स्कन्दो वरुणो यम:।।
    वैद्युतो जाठरश्चाग्निरैन्धनस्तेजसां पति:।
    धर्मध्वजो वेदकर्ता वेदाड़्गो वेदवाहन:।।
    कृतं तत्र द्वापरश्च कलि: सर्वमलाश्रय:।
    कला काष्ठा मुहूर्ताश्च क्षपा यामस्तया क्षण:।।
    संवत्सरकरोsश्वत्थ: कालचक्रो विभावसु:।
    पुरुष: शाश्वतो योगी व्यक्ताव्यक्त: सनातन:।।
    कालाध्यक्ष: प्रजाध्यक्षो विश्वकर्मा तमोनुद:।
    वरुण सागरोsशुश्च जीमूतो जीवनोsरिहा ।।
    भूताश्रयो भूतपति: सर्वलोकनमस्कृत:।
    स्रष्टा संवर्तको वह्रि सर्वलोकनमस्कृत:।।
    अनन्त कपिलो भानु: कामद: सर्वतो मुख:।
    जयो विशालो वरद: सर्वधातुनिषेचिता ।।
    मन: सुपर्णो भूतादि: शीघ्रग: प्राणधारक:।
    धन्वन्तरिर्धूमकेतुरादिदेवोsअदिते: सुत:।।
    द्वादशात्मारविन्दाक्ष: पिता माता पितामह:।
    स्वर्गद्वारं प्रजाद्वारं मोक्षद्वारं त्रिविष्टपम ।।
    देहकर्ता प्रशान्तात्मा विश्वात्मा विश्वतोमुख:।
    चराचरात्मा सूक्ष्मात्मा मैत्रेय करुणान्वित:।।
    एतद वै कीर्तनीयस्य सूर्यस्यामिततेजस:।
    नामाष्टकशतकं चेदं प्रोक्तमेतत स्वयंभुवा ।।

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