क्या आपने भी पहनी है तुलसी की माला? तो भूलकर भी न करें ये गलितयां, वरना होगा भारी नुकसान
चलिए पढ़ते हैं तुलसी माला धारण करने के लाभ, नियम और सही विधि, ताकि आपको इसका पूर्ण लाभ मिल सके। ...और पढ़ें

तुलसी माला धारण करने के नियम और लाभ (Picture Credit- AI Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में तुलसी की लकड़ी से बनी माला को अत्यंत पवित्र और चमत्कारी मानी जाती है। इसे गले में धारण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ कई शारीरिक लाभ भी मिलते हैं। हालांकि, शास्त्रों के अनुसार तुलसी की माला पहनने के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करने पर ही इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।
तुलसी माला पहनने के अद्भुत लाभ
- नियमानुसार तुलसी का माला धारण करने वाले साधक पर सदैव भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है।
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे सुख-शांति व समृद्धि आती है।
- यह मन को शांत करने का काम करता है, साथ ही इससे आध्यात्मिकता बढ़ाती है और स्वास्थ्य में भी लाभ देखने को मिलता है।
- यह माला नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्रदान करती है और एकाग्रता बढ़ाने का काम करती है।
धारण करने का शुभ दिन और समय
तुलसी माला को स्नान करने के बाद, भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करते हुए पूरी श्रद्धा के साथ गले में धारण करना चाहिए। तुलसी की माला पहनने के लिए सोमवार, बुधवार और गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना गया है। इसे अमावस्या के दिन धारण करने से बचना चाहिए। तुलसी माला पहनने के लिए 'प्रदोष काल' सबसे उत्तम माना गया है। आप किसी योग्य ज्योतिषी से शुभ मुहूर्त भी निकलवा कर उसमें भी तुलसी माला धारण कर सकते हैं।
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ध्यान रखें ये जरूरी नियम
- तुलसी माला पहनने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवन शैली अपनानी चाहिए। यदि इन नियमों का उल्लंघन होता है, तो जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।
- माला धारण करने के बाद लहसुन, प्याज, मांस-मछली और मदिरा (शराब) आदि का त्याग कर देना चाहिए। माला की पवित्रता बनाए रखने के लिए आप जब भी किसी कारण से माला को उतारें, तो दोबारा पहनने से पहले उसे गंगाजल या साफ जल से धोकर शुद्ध जरूर करें।
- तुलसी माला धारण करने वाले व्यक्ति को स्वच्छता का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।
- अशुद्ध अवस्था में इसे उतार देना चाहिए और स्नान आदि के बाद ही दुबारा धारण करना चाहिए।
माला टूट जाने पर क्या करें?
अगर आपकी तुलसी की माला पुरानी होकर खराब हो जाए या अचानक टूट जाए, तो उसे कभी भी कूड़े में या फिर इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए। टूटी हुई माला को सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर दें या फिर अपने घर के तुलसी के पौधे की मिट्टी में डाल दें। उसके स्थान पर नई माला को शुद्ध करके धारण करें।
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