Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सावन में क्यों नहीं खाते नॉनवेज और अगर गलती से खा लिया तो क्या करें? नोट करें हर सवाल का जवाब

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 05:30 PM (IST)

    सावन मास में मांसाहार से बचने के कई कारण हैं, जिनमें धार्मिक मान्यताएं, बदलते मौसम का प्रभाव, आयुर्वेद के सिद्धांत और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं। यदि ...और पढ़ें

    सावन के महीने में नॉनवेज न खाने के कारण और बचाव के उपाय (Picture Credits- AI Image)

    सावन के महीने में नॉनवेज न खाने के कारण और बचाव के उपाय (Picture Credits- AI Image)

    HighLights

    1. सावन में मांसाहार से बचने के धार्मिक और वैज्ञानिक कारण।

    2. मॉनसून में भोजन खराब होने, पाचन कमजोर होने का खतरा।

    3. अनजाने में मांसाहार सेवन पर प्रायश्चित के शास्त्रीय उपाय।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में श्रावण मास का अत्यंत महत्व है। इस पवित्र महीने के दौरान लाखों भारतीय मांसाहारी भोजन का सेवन करना छोड़ देते हैं। लेकिन ऐसा किया क्यों जाता है, इस सवाल का जवाब पौराणिक कथाओं, बदलते मौसम, आयुर्वेद और पर्यावरण के दिलचस्प मेल में छिपा है।

    हिंदू परंपरा के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष निकला था, जिससे पूरी सृष्टि पर खतरा पैदा हो गया था। भगवान शिव ने ब्रह्मांड की रक्षा के लिए उस विष को पी लिया और उसे अपने गले में ही रोक लिया, जिस कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। सावन से जुड़ी यह पौराणिक कथा आज भी प्रासंगिक है। श्रावण मास में भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं, सावन सोमवार का व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और पारंपरिक रूप से सादा शाकाहारी भोजन करते हैं।

    सावन महीने के दौरान मांसहार न करने के कारण

    भारत में सावन का महीना मॉनसून के दौरान आता है, जब वातावरण में अधिक नमी होने के कारण खाना जल्दी खराब हो सकता है और उसमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वही आयुर्वेद के नजरिये से देखा जाए तो वर्षा ऋतु के दौरान हमारी पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है, जिस वजह से भारी खाना खाने के बजाय हल्का और सादा खाना अधिक पसंद किया जाता है।

    श्रावण मास का महीना ध्यान, पूजा, जप-तप और संयम से जुड़ा माना जाता है, जहां शिव भक्ति करने के लिए सात्त्विकता का पालन करना बेहद जरूरी है। सावन के महीने में अधिक नमी के कारण वातावरण में बैक्टीरिया और वायरस काफी तेजी से बढ़ते हैं, जो इंसानों और जानवरों को आसानी से बीमार करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा इस मौसम में मांस तेजी से खराब होता है।

    खबरें और भी

    इसके अलावा सावन का महीना मछलियां और जानवरों के लिए प्रजनन का समय होता है। अगर इस समय उनका शिकार किया गया, तो उनकी आबादी को खतरा हो सकता है। जिससे हमारा जीवनचक्र प्रभावित हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर रोक लगाती है, ताकि मछलियों बिना किसी रुकावट के प्रजनन कर सके।

    सावन में नॉनवेज खा लिया तो क्या करें?

    एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, सावन का महीना पूर्णतः सात्विकता और पवित्रता का प्रतीक है। परंतु यदि अनजाने में या किसी गलती से इस महीने में मांसाहार का सेवन हो जाए, तो मन में ग्लानि होना स्वाभाविक है। शास्त्रों में अनजाने में हुई भूल के लिए प्रायश्चित के विधान बताए गए हैं।

    प्रायश्चित और शुद्धि के मुख्य उपाय

    गंगाजल से स्नान और आचमन

    सबसे पहले अगले दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद तीन बार आचमन करके मन को शुद्ध करें।

    शिवलिंग का अभिषेक और क्षमा याचना

    मंदिर में जाकर शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। भगवान आशुतोष के समक्ष दीपक जलाकर अपनी भूल स्वीकार करें और हाथ जोड़कर "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जाप करते हुए क्षमा मांगें।

    गायत्री मंत्र का जाप

    शरीर और आत्मा की आंतरिक शुद्धि के लिए एक माला (108 बार) गायत्री मंत्र का जाप करें। गायत्री मंत्र को पापों का नाश करने वाला माना गया है।

    व्रत और दान

    इस भूल के प्रायश्चित स्वरूप अगले दिन एकादशी या सावन के सोमवार का निर्जला या फलाहारी व्रत रखें। इसके अतिरिक्त किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अन्न, तिल या फल दान करें।

    गौ सेवा और संकल्प

    गौ माता की सेवा करने से कई प्रकार के दोष समाप्त हो जाते हैं। सच्चे मन से किया गया प्रायश्चित और दोबारा वह गलती न दोहराने का संकल्प ही व्यक्ति को दोषमुक्त बनाता है।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।