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    हवन में आखिर क्यों होता है सिर्फ आम की लकड़ी का इस्तेमाल?

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 10:15 AM (IST)

    हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या हवन में आम की लकड़ी का ही इस्तेमाल क्यों होता है? जानिए इसके पीछे का धार्मिक महत्व क्या है। ...और पढ़ें

    हवन में आम की लकड़ी का इस्तेमाल (Image Source: AI-Generated)

    हवन में आम की लकड़ी का इस्तेमाल (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ काम बिना हवन के पूरा नहीं माना जाता। चाहे गृह प्रवेश हो, शादी-ब्याह या फिर घर में किसी नए बच्चे का जन्म, घर की शुद्धि और शांति के लिए हवन जरूर कराया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और आसपास का माहौल एकदम पवित्र हो जाता है, जिससे नए कामों में बिना किसी रुकावट के सफलता मिलती है।

    लेकिन, क्या आपने कभी इस बात पर गहराई से गौर किया है कि हवन की वेदी में जलने वाली लकड़ियों में मुख्य रूप से आम की लकड़ी ही क्यों इस्तेमाल होती है? आखिर किसी और पेड़ की लकड़ी को इतनी तवज्जो क्यों नहीं दी जाती? दरअसल, इसके पीछे सिर्फ सदियों पुरानी आस्था ही नहीं, बल्कि कई ठोस वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं।

    पवित्रता और सकारात्मकता का है प्रतीक

    धार्मिक नजरिए से देखें तो आम की लकड़ी को बहुत ही पवित्र, उर्वरता और देवत्व का साक्षात प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में इसका इस्तेमाल जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि आम की समिधा (लकड़ी) से हवन करने पर घर के कोने-कोने में छिपी नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) बाहर निकल जाती है और सकारात्मकता का संचार होता है। इसके पवित्र धुएं से इंसान को मानसिक शांति मिलती है और बेवजह का तनाव दूर होता है।

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    (AI-Generated Image)

    शादी के बाद पति-पत्नी के दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहे और उनके बीच कोई गंभीर मनमुटाव न हो, इसके लिए भी आम की लकड़ी से हवन कराना बहुत शुभ माना जाता है। वहीं, जब घर में किसी शिशु की किलकारी गूंजती है, तो उसे जन्म से जुड़े कई तरह के ग्रह दोषों से बचाने और स्वस्थ जीवन देने के लिए भी यही लकड़ी जलाई जाती है।

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    हवन सामग्री के साथ क्यों जलाते हैं आम की लकड़ी?

    हवन सामग्री (जैसे घी, कपूर, गुग्गुल) के साथ जब आम की लकड़ी जलती है, तो इसका धुआं हवा को प्राकृतिक रूप से फिल्टर कर देता है। सनातन धर्म में भी आम के पेड़ को अत्यंत पवित्र और पूजनीय स्थान प्राप्त है। हमारे प्राचीन शास्त्रों और परंपराओं में इसे सुख-समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का साक्षात प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि किसी भी मांगलिक कार्य या पूजा-पाठ में आम के पत्तों का विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है। शुभ कार्यों के दौरान घर या मंदिरों के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों की तोरण सजाना बहुत ही मंगलकारी माना जाता है। इसी कारण से हर छोटे-बड़े यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में आम की लकड़ी का प्रयोग लगभग जरूरी बताया गया है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।