3 दिन तक भूखा-प्यासा रहा बच्चा, खुश होकर यमराज ने बताया मौत और आत्मा का गुप्त रहस्य!
कठोपनिषद में नचिकेता और यमराज के संवाद के माध्यम से आत्मा, मोक्ष और जीवन-मृत्यु के रहस्यों का वर्णन किया गया है। ...और पढ़ें

यमराज और नचिकेता संवाद (AI Generated Image)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कठोपनिषद हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण उपनिषद् जिसमें नचिकेता और यमराज के बीच बातचीत के जरिए से आत्मा, मोक्ष और जीवन-मृत्यु के रहस्यों पर विचार किया गया है। यह पौराणिक कथा नचिकेता की कहानी से शुरू होती है, एक छोटा बालक जिसके ज्ञान की भूख मिटाने के लिए यमराज को बनना पड़ा उसका गुरु।
एक समय में वाजश्रवस नाम के एक ऋषि ने यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ समाप्ति के बाद उन्होंने अपने समस्त धन-संपत्ति का दान करना शुरू कर दिया। वाजश्रवस का एक पुत्र जिसका नाम नचिकेता था। नचिकेता ने अपने पिता को खराब और बूढ़े गायों को दान करते देखा। उसे यह देखकर दुख हुआ कि, ऐसे दान का क्या मतलब जो धर्म के अनुसार न हो। उसने अपने पिता से पूछा, पिताश्री! आप मुझे किसे दान करेंगे?
वाजश्रवस ने नचिकेता को कई बार अनदेखा किया, लेकिन जब नचिकेता ने बार-बार एक ही सवाल पूछा, तो गुस्से में आकर उन्होंने कह दिया कि, मैं तुम्हें यमराज को दान करूंगा। नचिकेता ने अपने पिता के वचन को सच मानते हुए यमराज लोक की ओर प्रस्थान किया।
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नचिकेता की यमलोक यात्रा
नचिकेता जब यमलोक पहुंचा, तब यमराज वहां नहीं थे। तीन दिन और तीन रातें बिना जल और भोजन के नचिकेता यमराज की प्रतीक्षा करता रहा। जब यमराज लौटते हैं, तो नचिकेता को इंतजार करता देख वह प्रसन्न होने के साथ काफी भावुक हो जाते हैं और नचिकेता को तीन वरदान मांगने के लिए कहते हैं।
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नचिकेता का तीन वरदान
नचिकेता को यमराज से तीन वरदान मांगने थे, तो उन्होंने पहला वरदान अपने पिता की शांति और स्नेह के लिए मांगा। यमराज ने यह वरदान फौरन पूरा कर दिया।
दूसरे वरदान में नचिकेता की यह इच्छा थी कि, वह यज्ञ के रहस्य को समझे। यमराज ने उसे यज्ञ से जुड़े नियम और उसके फलों के बारे में विस्तार से बताया।
तीसरे वरदान में नचिकेता ने आत्मा के रहस्य और मोक्ष के ज्ञान को समझने की इच्छा जाहिर की। यमराज इसे सुनकर नचिकेता को कई तरह के सुख-सुविधाओं का प्रलोभन देते हैं, लेकिन नचिकेता उन सभी प्रलोभनों को ठुकरा देता है और केवल आत्मज्ञान के रहस्य को समझने की मांग करता है।

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यमराज का नचिकेता को उपदेश
यमराज नचिकेता की दृढ़ इच्छा शक्ति और ज्ञान की भूख से काफी प्रभावित होते हैं और उसे आत्मा, मृत्यु और मोक्ष के रहस्यों के बारे में बताते हैं। यमराज उसे समझाते हैं कि, आत्मा अमर है, यह शरीर से परे है जो न जन्म लेती है और न ही नष्ट होती है। वे बताते हैं कि, सच्चा ज्ञान प्राप्त करने से ही आत्मा को मोक्ष मिलता है और यह ज्ञान केवल ध्यान और आत्मचिंतन से प्राप्त होता है।
आत्मा क्या है?
यमराज बताते हैं कि, आत्मा एक अद्वितीय और अनंत शक्ति का प्रतीक है, जो हर किसी भी मौजूद है। यह आत्मा सभी बंधनों से मुक्त है और सिर्फ उसे ही परम शांति और आनंद की प्राप्ति होती है जिसने आत्मज्ञान हासिल किया है। उन्होंने नचिकेता को सिखाया कि कैसे मन और इंद्रियों को नियंत्रित करके आत्मा के सच्चे स्वरूप को महसूस किया जा सकता है।
नचिकेता को हासिल गुप्त ज्ञान
नचिकेता ने यमराज से प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में आत्मसात किया और आत्मज्ञान हासिल किया। उसकी यात्रा हमें सिखाती है कि, सच्चे ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए धैर्य, समर्पण और सच्चे गुरु की जरूरत होती है।
कठोपनिषद की यह कथा हमें बताती है कि, जीवन का सच्चा उद्देश्य आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना है और मोक्ष की ओर अग्रसर होना है।
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