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फतेहपुर सीकरी की 7000 साल पुरानी राॅक पेंटिंग्स अब संरक्षित धरोहर, गुप्तकाल तक की निशानियां

By Nirlosh KumarEdited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 23 Oct 2026 01:07 PM (GMT+05:30)

फतेहपुर सीकरी की अरावली पहाड़ियों में स्थित 7000 साल पुरानी शैल चित्रों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संरक्षित धरोहर ...और पढ़ें

फतेहपुर सीकरी में बनी रॉक पेंटिंग्स।

फतेहपुर सीकरी में बनी रॉक पेंटिंग्स।

निर्लोष कुमार, आगरा। फतेहपुर सीकरी में अरावली की पहाड़ियों में स्थित राॅक शैल्टर्स (शैलाश्रय) में बनी सात हजार वर्ष पुरानी राॅक पेंटिंग्स (शैल चित्र) अब संरक्षित धरोहर हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत द्वारा इसके लिए प्रारंभिक अधिसूचना कर दी गई है। एएसआइ ने अधिसूचना कर 60 दिन में आपत्ति मांगी है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम अधिसूचना की जाएगी।

एएसआइ के आगरा सर्किल में अब संरक्षित स्मारकों की संख्या बढ़कर 154 हो जाएगी। फतेहपुर सीकरी में रसूलपुर, मदनपुरा, पतसाल और जाजौली में सात हजार वर्ष पहले (उत्तर पाषण काल) से लेकर गुप्त काल (तीसरी शताब्दी तक) के मध्य बनी राक पेंटिंग्स हैं।

रसूलपुर में 12, जाजौली (मदनपुरा) में आठ और पतसाल में चार राॅक शैल्टर्स की खोज 1980 के दशक में राॅक आर्ट सोसायटी आफ इंडिया के सचिव पुरातत्वविद् डा. गिरिराज कुमार ने की थी। अवैध खनन से अनमोल धरोहर को काफी क्षति पहुंची। सुप्रीम कोर्ट द्वारा खनन पर रोक लगाने के बाद कुछ राक शैल्टर्स बचे हैं। इनमें राॅक पेंटिंग्स बनी हुई हैं, जो देखरेख के अभाव में नष्ट हो रही थीं।

एएसआइ द्वारा संरक्षित किए जाने से उनका बचाव हो सकेगा। दिल्ली में एएसआइ की तकनीकी मूल्यांकन समिति की बैठक में राॅक शैल्टर्स के संरक्षण के प्रस्ताव को सहमति दे दी गई थी। इसके बाद 14 अक्टूबर को विभाग ने इन्हें रसूलपुर, पतसाल और जाजौली (मदनपुरा) स्थित राक शैल्टर्स को संरक्षित स्मारक घोषित करने को प्रारम्भिक अधिसूचना जारी कर दी।

पतसाल व जाजौली की राॅक शैल्टर्स हैं सबसे अधिक चित्रित

पतसाल व जाजौली स्थित राॅक शैल्टर्स सबसे अधिक चित्रित हैं। इनमें बने चित्र उत्तर पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक के हैं। पतसाल के पास खेतों में ऐसे साक्ष्य मिले थे, जिनसे साबित होता है कि यहां आदिमानव रहते होंगे। पतसाल में पेड़-पौधे, पशु समूह, नृत्य व हथियारों से संबंधित राॅक पेंटिंग्स हैं। मदनपुरा में दंतीला हाथी, नील गाय दो सांड और रसूलपर में जटिल अल्पना चित्र बने हुए हैं।

चिल की गुफा, नाई की गुफा के नाम से जानी जाती हैं

रसूलपुर में खसरा नम्बर 276 की एक हेक्टेयर भूमि के लिए अधिसूचना की गई है। यह स्थान चिल की गुफा के नाम से जाना जाता है। पतसाल में खसरा नम्बर 718/2 की 0.396 हेक्टेयर भूमिके लिए अधिसूचना की गई है। यह स्थान नाई की गुफा के नाम से जाना जाता है। जाजौली में खसरा नम्बर 138 की 0.63 हेक्टेयर भूमि के लिए अधिसूचना की गई है।