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    कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने कहा, चुनौतियों का सामना करना ही धर्म; डर कर भागने वाला नहीं होता प्रभु को प्रिय

    By Sandeep Kumar Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Tue, 02 Jun 2026 10:18 PM (IST)

    आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने बल्केश्वर पार्क में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान बताया कि चुनौतियों का सामना करना ही धर्म है और भगवान को वही प्रिय है जो संकट ...और पढ़ें

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    बल्केश्वर मैदान में कथा सुनाते इंद्रेश उपाध्याय।

    जागरण संवाददाता, आगरा। जो व्यक्ति चुनौतियों से भागता है या जीवन में अल्प मार्ग (शार्टकट) अपनाता है, वह भगवान को प्रिय नहीं होता। संकट चाहे जितना भी बड़ा हो, उसका सामना धैर्य और साहस के साथ करना ही धर्म का मार्ग है।

    बल्केश्वर पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में यह संदेश व्यासपीठ से प्रसिद्ध कथाव्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने देकर जीवन, भक्ति और कर्तव्य का गूढ़ संदेश समझाया। बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल के आयोजन में तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने नृसिंह और वामन अवतार समेत विभिन्न प्रसंगों का रसपान किया।

    कथा का शुभारंभ भक्ति गीत संकट हरेंगी, करेंगी भली, वृषभानु की लली... से हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया और श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे। आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने बताया कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, भगवान किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की रक्षा करते हैं।

    जीवन में सत्य और धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए, भले ही परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि कोई व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर है, तो उसे किसी भी परिस्थिति में भयभीत नहीं होना चाहिए। समय आने पर प्रभु स्वयं सत्य को प्रकट करते हैं। निश्चित होकर जीवन जिएं और धर्म मार्ग पर अडिग रहें।

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    आत्महत्या को जीवन का सबसे बड़ा पाप बताते हुए कहा कि ऐसा करने वाले जीव को अत्यंत कष्टपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ता है। जीवन भगवान का दिया अनमोल उपहार है और इसका सम्मान करना चाहिए। धर्म और परम धर्म की व्याख्या की कि सिर्फ अपने कल्याण की कामना करना धर्म है, लेकिन सबके कल्याण की भावना रखना परम धर्म है।

    अंतःकरण से कथा श्रवण और भक्ति में लीन रहना आत्मा को पवित्र करता है। मुख्य यजमान हरीश अग्रवाल, तरूणा अग्रवाल, भोलानाथ अग्रवाल, वीरेंद्र कुमार, शिवशंकर रैपुरिया, बसंत गोयल, कुसुम गोयल, प्रीति अग्रवाल, रजनी अग्रवाल, शोभित अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

    मोबाइल की लत पर चिंता, बच्चों के संस्कारों पर जोर

    आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने वर्तमान समय में बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत पर चिंता जताई कि आज बच्चे अधिक समय मोबाइल और गेम्स में व्यतीत कर रहे हैं। इसके लिए सिर्फ बच्चों को पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया जा सकता, यह माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को अच्छे संस्कार दें।

    बच्चों को बचपन से ही भक्ति, रामायण और भागवत जैसी धार्मिक पुस्तकों व भजन-कीर्तन से जोड़ें, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक दिशा विकसित हो सके।