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चंद्रचूड़ सिंह की 10 एकड़ की पुस्तैनी हवेली कब्जाई: बोले- पिता की मौत के बाद फर्जी वसीयत बनवाई, चाची समेत 7 पर केस

By Manoj JadounEdited By: Abhishek Saxena
Updated: Sun, 30 Aug 2026 09:57 AM (IST)

अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह और उनके भाई अभिमन्यु सिंह ने अलीगढ़ में अपनी चाची व अन्य सात लोगों के खिलाफ पैतृक ...और पढ़ें

अलीगढ़ थाना पहुंचे एक्टर चंद्रचूड़ सिंह।

अलीगढ़ थाना पहुंचे एक्टर चंद्रचूड़ सिंह।

HighLights

  1. अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह ने चाची समेत सात पर मुकदमा किया।

  2. अलीगढ़ में 10 एकड़ की पुश्तैनी हवेली का विवाद।

  3. फर्जी वसीयत और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया।

मनोज जादौन, अलीगढ़। ‘चप्पा-चप्पा चरखा चले’ गाने वाली माचिस, क्या कहना और दाग द फायर जैसी हिट फिल्म देने वाले अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के चरखे के पहिए परिवार की संपत्ति बंटवारे के विवाद से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। अपनी चाची, चचेरे भाई-बहन समेत सात लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर पैतृक हवेली व करोड़ों की संपत्ति हड़पने का मुकदमा पंजीकृत कराने के बाद शनिवार को वह अपने भाई व फिल्म निर्देशक अभिमन्यु सिंह के साथ पुलिस के सामने पहुंचे।

दोनों भाइयों को जलालपुर पुलिस चौकी बुलाकर करीब आधे घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान दोनों ने संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारी को सौंपे।

जलालपुर में हैं पैतृक हवेली

पैतृक हवेली खैर रोड स्थित जलालपुर में है। वर्ष 1885 में बनी। लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में फैली है। इससे जुड़ी करीब 56 एकड़ जमीन है। चंद्रचूड़ सिंह के पिता कैप्टन बलदेव सिंह सेना में थे और अवकाश के दिनों में यहां आते थे। उनके छोटे भाई पुण्य प्रताप सिंह और गंगा सिंह हवेली में रहते थे तथा जमीन की देखभाल और खेती करते थे।

कैप्टन बलदेव सिंह के तीन बेटे

कैप्टन बलदेव सिंह के तीनों बेटे चंद्रचूड़ सिंह, अभिमन्यु सिंह और नारायण सिंह फिल्मी क्षेत्र से जुड़े होने के कारण मुंबई में रहते हैं। उनके चाचा पुण्य प्रताप सिंह और गंगा सिंह के परिवार के सदस्य विदेश में रहते थे। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद बलदेव सिंह राजनीति में आए और विधायक बने। तब यहां रहने लगे। बाद में बलदेव सिंह और उनके भाई पुण्य प्रताप सिंह का निधन गया है। गंगा सिंह का अक्टूबर 2025 में निधन हुआ था। तब चंद्रचूड़ सिंह परिवार के साथ पैतृक हवेली पहुंचे थे।

आरोप है कि गंगा सिंह की पत्नी गायत्री देवी ने उन्हें हवेली में प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में चंद्रचूड़ सिंह को हवेली में प्रवेश कराया गया। इसी घटनाक्रम के बाद पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद खुलकर सामने आया।

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थाने पहुंचे चंद्रचूड़ सिंह।

यह लगाए आरोप

चंद्रचूड़ सिंह और अभिमन्यु सिंह का आरोप है कि उनके दादा हरेंद्र पाल सिंह की गंभीर बीमारी का फायदा उनके चाचा गंगा सिंह ने उठाया। हरेंद्र पाल सिंह के निधन से एक दिन पहले 30 जनवरी 1997 को फर्जी वसीयत तैयार कराकर उनके नाबालिग पुत्र जय सिंह के नाम संपत्ति करा ली गई। वर्ष 1995 की वसीयत पंजीकृत है, जिसमें पैतृक संपत्ति तीनों पुत्रों में बराबर बांटी गई है। करीब 150 करोड़ रुपये की पैतृक संपत्ति पहले ही बेची जा चुकी है। इस मामले को लेकर वह वर्ष 2025 में नवंबर और दिसंबर में एसएसपी और डीएम से मिले थे।

गायत्री देवी भी अपने पुत्र के साथ अधिकारियों से मिली थीं

गायत्री देवी भी अपने पुत्र के साथ अधिकारियों से मिली थीं। उन्होंने चंद्रचूड़ सिंह और अभिमन्यु सिंह के संपत्ति पर दावे को गलत बताया था। उनका आरोप है कि अंतिम वसीयत ही सही मानी जाती है, जिसमें हरेंद्र पाल सिंह ने संपत्ति उनके बेटे के नाम की है। परिवार के कुछ लोग जबरन इसे हड़पना चाह रहे हैं।

दूसरे पक्ष से जल्द संपर्क करेगी पुलिस

14 अगस्त 2026 को अभिमन्यु सिंह ने अपनी चाची गायत्री देवी, चचेरे भाई जय सिंह, बहन अंजनी सिंह, वसीयत के गवाह संदीप कुमार सिंह व शिव कुमार, राबिन एकसन तथा अधिवक्ता अजीत सिंह तोमर के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर संपत्ति हड़पने का आरोप लगाते हुए रोरावर थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया। इसकी जांच कर रहे उप निरीक्षक सचिन कुमार ने बताया कि एक पक्ष के चंद्रचूड़ सिंह व अभिमन्यु सिंह से मुकदमे के संबंध में पूछताछ की जा रही है। अब दूसरे पक्ष से संपर्क किया जाएगा।

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यही है हवेली।

बहन गिरजा कुमारी के बयान ने दी मजबूती

गिरजा कुमारी ने दिसंबर 2025 में अपने भाई स्व. गंगा सिंह के विरोध में अपने बयान दिए थे। उन्होंने डीएम व एसएसपी के नाम दिए एफीडेविट में दावा किया है कि जब उनके पिता हरेंद्र सिंह का निधन हुआ था, तब वे एक माह से हवेली में ही थी। वे इतने बीमार थे कि न तो वे किसी को पहचान सकते थे। न ही हस्ताक्षर करने की दिशा में थे। मृत्यु से एक दिन पहले जिस वसीयत को गंगा सिंह असली बता रहे थे, वह कूट रचित दस्तावेजों से तैयार व फर्जी थी। यही बयान मुकदमा पंजीकरण में सहायक रहा।

आरोपित गायत्री देवी के जेठ पुण्य प्रताप सिंह के चार संतान हैं। इनमें दो बेटा युद्धिष्ठ सिंह व अगस्त सिंह व दो बेटी हैं। यह मुंबई व लंदन में रहते है। यह भी अपनी चाची गायत्री देवी के विरोध में हैं।

शहर विधायक रहे हैं कैप्टन

कैप्टन बलदेव सिंह अपने परिवार के साथ मुंबई में शिफ्ट हो गए। तब वह राजनीतिक पारी खेलने का मन बना चुके थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। वे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के काफी निकट रहे। पार्टी से वे वर्ष 1985 में शहर विधानसभा से निर्वाचित हुए। इसके बाद वे रालोद व अन्य पार्टियों से जुड़े। वर्ष 2022 में बीमारी के चलते उनकी मृत्यु हो गई।

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प्रशंसकों ने ली सेल्फी

शनिवार को चंद्रचूड़ सिंह के जलालपुर पुलिस चौकी पहुंचने की जानकारी पर उनके प्रशंसक भी वहां पहुंच गए। कई लोगों ने अभिनेता के साथ सेल्फी ली और आटोग्राफ लिए। पुलिस चौकी के बाहर उनकी एक झलक पाने के लिए लोगों में उत्साह दिखाई दिया।

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