आजमगढ़ में अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती के नाम पर 500 से अधिक युवाओं से ठगी, तीन आरोपी गिरफ्तार
आजमगढ़ पुलिस ने अर्धसैनिक बलों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिर ...और पढ़ें

डॉ. अनिल कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, आजमगढ़। जनपद की पुलिस ने सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपितों राहुल कुमार, राकेश यादव और प्रदीप यादव निवासी रानी की सराय को गिरफ्तार किया है।
गिरोह का सरगना विद्यासागर सहित पांच लोग अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। पूरे मामले की जानकारी तब हुई, जब भर्ती होकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुछ अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी सामने आई और उनकी सेवा समाप्त कर उन्हें बाहर कर दिया गया।
पुलिस की अभी तक की जांच में अकेले आजमगढ़ के 50 से 60 युवक जालसाजी का शिकार हुए हैं, जबकि गाजीपुर, बलिया और जौनपुर समेत पूर्वांचल में पीड़ितों की संख्या 500 से अधिक हो सकती है।
गिरोह युवाओं से छह से दस लाख रुपये तक लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों का फर्जी डोमिसाइल और अन्य दस्तावेज तैयार कर भर्ती प्रक्रिया में शामिल कराता था। हालांकि अब तक कुल ठगी की रकम का आधिकारिक आकलन नहीं हो सका है।
पुलिस अभी विवेचना कर रही है, लेकिन पुलिस भी यह मान रही है कि गिरोह के नेटवर्क अन्य राज्यों से जुड़े है इसलिए ठगी की रकम काफी बड़ी हो सकती है।
पूर्वोत्तर राज्य के डोमिसाइल पर अर्धसैनिक बल और सेना में भर्ती में विशेष छूट मिलती थी। जिसमें कटऑफ, शारीरिक मापदंड और आयु जैसा लाभ भर्ती में आसानी से मिल जाता है, इसी का झांसा देकर गिरोह लोगों से ठगी करता था।
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रानी की सराय थाना क्षेत्र के अंधौरी गांव निवासी पंकज यादव ने 20 मई को तहरीर देकर थाने में तहरीर देते हुए बताया था कि अर्द्ध सैनिक बल में नौकरी दिलाने के नाम पर विद्यासागर, राहुल कुमार, वीरेंद्र यादव, राकेश यादव, प्रदीप यादव और मुन्ना शर्मा ने मिलकर 10 लाख रुपये लिए थे।
कैश रकम ही लेता था विद्यासागर
एक पीड़ित ने नाम न बताने के शर्त पर बताया कि गिरोह के सदस्य दौड़ और भर्ती की तैयारी करने वाले मैदानों में पहुंचकर युवाओं से संपर्क करते थे। खुद को प्रभावशाली बताकर नौकरी लगवाने का दावा करते थे।
झांसे में लेने के लिए कुछ युवकों की तस्वीर दिखा कर बताते थे कि उन्होंने सीआरपीएफ, बीएसएफ में भर्ती कराया। उनकी पहुंच भर्ती करने वाले कई अधिकारियों से है। झांसा में आने के बाद जब धनराशि देने की बता होती थी, गिरोह का सरगना विद्यासागर और बलिया का रहने वाला मुन्ना शर्मा केवल कैश लेने की बात कहते थे।
कैश नहीं देने पर वह काम कराने से मना कर देते थे। वे अभ्यर्थी से कहते थे कि बैंक में रुपये जाने के बाद पुलिस को पता चल जाएगा। भर्ती का फार्म भरने सहित अन्य दस्तावेज गिरोह के सदस्य स्वयं तैयार करते थे। अभ्यर्थी को केवल परीक्षा देने जाना होता था।
मां के आभूषण और खेत गिरवी रख दिया था पांच लाख
शिकायत करने वाले एक पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2021 में सीमा सुरक्षा बल में भर्ती के लिए उसका गिरोह से पांच लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। उसने धनराशि जुटाने के लिए मां के आभूषण और खेत गिरवी रख पांच लाख रुपये दिए थे। गिरोह ने मेरा असम का डोमिसाइल बनाकर दिया था, जब मैं असम पहुंचा था तो मेरे साथ जनपद के 50 से 60 लड़के थे।
वहीं जौनपुर, गाजीपुर बलिया सहित पूर्वांचल के 500 से अधिक अभ्यर्थी विभिन्न अर्धसैनिक बल में भर्ती के लिए पहुंचे थे। मेरी भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशिक्षण के दौरान दस्तावेजों की सेना की विभागीय जांच में सब कुछ फर्जी निकला। बीएसएफ ने वर्ष 2024 में कोर्ट मार्शल कर बाहर कर दिया। इसके बाद जब आरोपित से धन वापसी का दबाव बनाया तो उसने जान से मारने की धमकी देने लगा।
अर्धसैनिक बल में नौकरी के नाम पर ठगी का मामला प्रकाश में आया है, कितने की ठगी हुई है अभी इसका आकलन नहीं हो सका है। गिरोह ने बड़े पैमाने पर ठगी की है, जिसकी जांच चल रही है। फरार आरोपितों के गिरफ्तारी को दो टीमें गठित की गई है, विवेचना पूरी होने के बाद मामला स्पष्ट हो पाएगा। -डॉ. अनिल कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़।
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