42 वर्ष पहले ली थी जमीन, नेशनल हाईवे भी बन गया... अब आई मुआवजे की सुध
42 साल पहले अधिग्रहित जमीन के मुआवजे का मामला अब सामने आया है। जमीन मालिकों को नेशनल हाईवे बनने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला था। अब प्रशासन ने मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे लोगों में खुशी है और उन्हें अपने हक मिलने की उम्मीद है।

बागपत-सोनीपत नेशनल हाईवे। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, बागपत। 42 साल पहले बने बागपत-सोनीपत नेशनल हाईवे के लिए ली गई जमीन का मुआवजा मिलने का अधिकांश किसानों को आज भी इंतजार है। हालांकि डेढ़ करोड़ रुपये का मुआवजा पिछले साल बंट चुका है, लेकिन साढ़े तीन करोड़ का मुआवजा बंटना बाकी है। अब लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन ने शासन से एक करोड़ के बजट की डिमांड की है, जो जल्द मिलने की उम्मीद है।
यूपी-हरियाणा राज्यों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए वर्ष 1983 में बागपत-सोनीपत मार्ग का निर्माण कराया। मगर गौरीपुर जवाहर नगर के 21 खेतों तथा निवाड़ा गांव के 15 खेतों की जमीन का अधिग्रहण किए बिना करीब दो किमी लंबी सड़क का निर्माण कराया। जिनके जमाने में यह सड़क बनी, उनमें से अनेक किसान मुआवजा मिलने के इंतजार में ही स्वर्ग सिधार गए हैं। यानी दादा के जमाने में बनी सड़क का मुआवजा मिलने का पौत्रों को इंतजार है। हालांकि किसानों ने लंबा संघर्ष किया तो कुछ साल पहले लोक निर्माण विभाग तथा किसानों के बीच जमीन की रजिस्ट्री कराने का समझौता हुआ।
लोक निर्माण विभाग को 5.10 करोड़ रुपये चुकाने थे, जिसमें से पिछले साल कई किसानों को डेढ़ करोड़ रुपये दिए गए। साढ़े तीन करोड़ रुपये का मुआवजा बंटना बाकी है लेकिन लोक निर्माण विभाग के पास बजट नहीं है। अब एक्सईएन लोक निर्माण विभाग ने शासन से एक करोड़ रुपये की डिमांड की है। एक्सईएन अतुल कुमार ने कहा कि हमारे पास जिन किसानों के आवेदन आए उनके आधार पर हमने बजट की डिमांड की है। बाकी किसानों के आवेदन जैसे ही हमें मिलेंगे वैसे ही बाकी ढाई करोड़ रुपये की डिमांड कर ली जाएगी। अब किसानों को उनकी जमीन की कीमत देने में कोई अड़चन नहीं है। दो चार दिन में मांगा गया बजट मिलने की उम्मीद है।
आंकड़े बताते हैं...
5.10 करोड़ रुपये किसानों की जमीन का बना
1.50 करोड़ रुपये गत वर्ष कई किसानों को दिए
3.50 करोड़ रुपये किसानों को दिए जाने बाकी

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