छतों पर बंदर और सड़कों पर कुत्तों का आतंक : यूपी के इस शहर के पार्षद भी हुए परेशान
उत्तर प्रदेश के एक शहर में बंदरों और कुत्तों के आतंक से लोग परेशान हैं। छतों पर बंदर और सड़कों पर कुत्तों के कारण नागरिकों में डर का माहौल है। स्थानीय पार्षदों ने इस समस्या पर चिंता जताई है और प्रशासन से इसका समाधान निकालने की मांग की है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
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प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, बरेली। वैसे तो प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा शहर होगा, जहां पर कुत्तों का आतंक न हो। मगर, यूपी में बरेली एक ऐसा शहर है, जहां पर कुत्तों के साथ ही बंदरों ने भी जबरदस्त आतंक फैला रखा है। बंदरों के उत्पात के चलते सड़कों से लेकर घरों की छतों तक लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। दोनों जानवरों का आतंक इस कदर फैल गया कि पार्षदों ने कार्यकारिणी की बैठक में इस समस्या पुरजोर तरीके से उठाया।
बरेली नगर निगम की बैठक में शहर के विकास को लेकर शनिवार को पुनरीक्षित बजट के चर्चा के दौरान कई मुद्दे पर कार्यकारिणी ने अधिकारियों को घेरने की कोशिश की। पार्षदों ने कहा कि बंदरों के उत्पात बढ़ने से सर्दी में लोग छतों पर बैठने से भी कतरा रहे हैं। घर के आसपास खुले में धूप लेने पर आवारा कुत्ते हमले कर रहे हैं। अधिकारियों की ओर से सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है। इस पर निगम अधिकारियों ने बताया कि बंदरों को पकड़ने के लिए जोन-वार टेंडर आमंत्रित की गई है।
कुत्तों के बधियाकरण में तेजी लाने के लिए 150 कुत्तों की क्षमता का सीबीगंज में नया एनिमल बर्थ केयर सेंटर संचालन की तीसरी बार निविदा आमंत्रित की गई है। साथ ही 45 से अधिक स्थानों पर फीडिंग प्वांइट बनाकर आवारा कुत्तों के खान-पान को रखने का स्थान निश्चित किया गया है। इस पर सतीश मम्मा, हरीशंकर राजपूत व रंजीत कुमार ने कहा कि उन्हें फीडिंग प्वाइंट कहां बने हैं इसकी जानकारी नहीं है। इस पर महापौर ने कहा कि सभी क्षेत्र के पार्षदों को इसकी जानकारी दी जाए। कुत्तों के बधियाकरण में सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन किया जाए और व्यवस्था बनाने में पार्षदों का भी सहयोग लिया जाए।
महापौर डा. उमेश गौतम की अध्यक्षता में कार्यकारिणी समिति की बैठक में पार्षदों ने लिपिकों की कार्यशैली पर सवाल उठाया। कहा कि निर्माण और टैक्स विभाग के लिपिकों की ओर से आए दिन फाइलों के गुम होने और छेड़छाड़ की बात सामने आ रही। इस पर महापौर ने भी सहमति जताते हुए कहा कि नगर आयुक्त और उनका कार्यालय आमने-सामने है, इसके बाद भी फाइलों को उनके कार्यालय में पहुंचने में नो से दस दिन लग जाते हैं। इतने दिन लिपिक फाइलों को क्यों रखते हैं। लिपिकों के कार्यशैली में सुधार नहीं लाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
पार्षदों ने कहा कि जोन कार्यालय बन गए हैं लेकिन वहां कोई भी अधिकारी नहीं बैठते। इस पर नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने कहा कि अधिकारियों की उपलब्धता के आधार पर आगामी दिनों में दिन-वार ड्यूटी लगाई जाएगी। इस दौरान विज्ञापन पट और अनाधिकृत रूप से ट्रांसफार्मर पर कार्रवाई की मांग की गई। इस पर नगर आयुक्त ने बताया कि विज्ञापन विभाग और निर्माण विभाग की ओर से कार्रवाई की जा रही है। विज्ञापन प्रभारी राजीव राठी ने बताया, जिन एजेंसियों की ओर से भुगतान नहीं हुआ, उन्हें नोटिस भेजते हुए कार्रवाई की जा रही है।
पार्षदों के क्षेत्र में होते कार्यक्रम, नहीं दी जाती जानकारी
बजट बैठक में कार्यकारिणी सदस्यों ने अपने अधिकार की भी चिंता व्यक्त की। आए दिन अलग-अलग वार्डों में जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन की ओर से विभिन्न सरकारी आयोजन किए जाते हैं मगर उन्हें कार्यक्रम में बुलाने तो दूर सूचना तक भी नहीं दी जाती। इस पर महापौर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बरेली कालेज मैदान में हूए सामूहिक विवाह आयोजन की निगम के अधिकारियों को ही जानकारी नहीं दी गई।
इस दौरान सीबीगंज की पार्षद ने कहा कि उनके क्षेत्र में गोशाला है लेकिन उन्हें निरीक्षण की अनुमति नहीं दी जाती। इस पर महापौर ने कहा कि जाने से पहले अधिकारियों को जानकारी दी जाए जिससे वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को इसी सूचना हो। बैठक में अपर नगर आयुक्त शशि भूषण राय, संयुक्त नगर आयुक्त मयंक यादव पार्षद संतोष देवी, मुकेश सिंघल, अंजुल और अन्य अधिकारी और पार्षद रहे।
शहर के चतुर्मुखी विकास के लिए कार्यकारिणी समिति ने 978 करोड़ के बजट की स्वीकृति प्रदान की है। प्रयास है कि शहर का कोई भी क्षेत्र विकास से अछूता नहीं रहे। मलिन बस्तियों में रोड, सीवर, पानी आदि पर तेजी से कार्य कराए जा रहे हैं। बंदर-कुत्तों के उत्पात से निजात मिले इसके लिए अधिकारियों को ठोस पहल करने के निर्देश दिए गए हैं।
- डा. उमेश गौतम, महापौर
नगर निगम कार्यकारिणी समिति ने पुनरीक्षित बजट को सर्वसम्मति से पास कर दिया है। अभियंताओं को सभी क्षेत्र में विकास कार्यों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।
- संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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