निराश होकर बैठ गए थे, अब 40 वर्ष बाद मिला मुआवजा...यूपी में चंदक-वालीबाल मार्ग के लिए अधिग्रहित की थी भूमि
बिजनौर के रायपुर बेरीसाल गाँव के 35 किसानों को 40 साल बाद उनकी जमीन का मुआवजा मिला। 1983 में चंदक-वालीबाल मार्ग के लिए उनकी जमीन ली गई थी, लेकिन मुआवजा नहीं मिला था। भाकियू अराजनैतिक के प्रयासों से किसानों को 1.72 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला, जिससे सड़क निर्माण का काम शुरू हो सका।

बिजनौर के रायपुर बेरीसाल गाँव के 35 किसानों को 40 साल बाद उनकी जमीन का मुआवजा मिला। (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, बिजनौर : चंदक-वालीबाल मार्ग के निर्माण को 40 साल पहले ग्राम रायपुर बेरीसाल के 35 ग्रामीणों की अधिग्रहित की गई भूमि का 1.72 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान कर दिया। पीड़ित किसानों का कहना था कि वह मुआवजा दिलाए जाने की मांग को लेकर चक्कर काट रहे थे, किंतु कोई सुनवाई नहीं की गई। उनका यह भी कहना था कि भाकियू अराजनैतिक के पदाधिकारियों की मदद से उन्हें मुआवजा मिला है।
चंदक से रायपुर बेरीसाल होते हुए बालवाली जाने वाले मार्ग के लिए वर्ष 1983 में ग्राम रायपुर बेरीसाल के किसान नागेंद्र सिंह, मलखान सिंह और कृपाल सिंह समेत 35 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन उक्त जमीन के मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। 40 साल बीतने के बावजूद उन्हें भु्गतान नहीं मिला, तो उन्होंने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने शुरू कर दिए, किंतु कोई समाधान नहीं हुआ।
मुआवजा नहीं मिलने की वजह से सड़क के निर्माण का काम बाधित हो गया था। पीड़ित किसानों ने भाकियू अराजनैतिक की युवा इकाई के प्रदेशाध्यक्ष दिगंबर सिंह से संपर्क कर इस समस्या के समाधान कराए जाने की मांग की। इन ग्रामीणों का कहना है कि यूनियन के पदाधिकारियों के प्रयास से उन्हें 1.72 करोड़ रुपये का मुआवजा मिल गया। ने बताया कि गांव रायपुर बेरीसाल के किसानों को मुआवजा न मिलने पर उन्हें मुआवजा दिलाने का पूरा प्रयास किया जा रहा था।
किसानों को मुआवजा न मिलने से सड़क निर्माण भी बाधित था। भाकियू नेता दिंगबर सिंह ने इन किसानों को मुआवजा दिलाए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि इन किसानों ने लोनिवि को बैनामे कर दिए है।

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