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Diwali 2026: मंदाकिनी की लहरों पर तैरते लाखों दीप, 500 ड्रोन से रामलीला; चित्रकूट में उमड़े 24 लाख श्रद्धालु

Published: Sun, 08 Nov 2026 07:14 PM (IST)

दीपावली पर चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के घाट लाखों दीपों से जगमगा उठे, जहां 24 लाख श्रद्धालुओं ने दीपदान किया। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मंदाकिनी पर लाखों दीपों से जगमगाए चित्रकूट के घाट।

  2. दीपावली पर 24 लाख श्रद्धालुओं ने किया दीपदान।

  3. 500 ड्रोन से पेश की गई अद्भुत रामलीला।

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। Chitrakoot Mandakini Ghat Deepotsav: मंदाकिनी की लहरों पर तैरते लाखों दीप, घाटों पर गूंजते जय श्रीराम के जयकारे और रोशनी से नहाई धर्मनगरी... दीपावली की अमावस्या पर भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में ऐसा अद्भुत दृश्य नजर आया, मानो धरती पर आकाशगंगा उतर आई हो। रामघाट से लेकर कामदगिरि तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे भक्तों ने मंदाकिनी में स्नान कर दीपदान किया और भगवान कामतानाथ के दर्शन-परिक्रमा कर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की। गोधूलि बेला में जब नदी के घाटों पर दीपों की कतारें सजीं तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। शाम को 500 ड्रोन से पेश की रामलीला ने उसमें चार चांद लगा दिए।

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धनतेरस से शुरू हुए पांच दिवसीय दीपदान महोत्सव का मुख्य आकर्षण अमावस्या का दीपदान रहा। सुबह से ही श्रद्धालु मंदाकिनी के घाटों पर पहुंचने लगे थे। कोई परिवार के साथ पैदल आया तो कोई बस और ट्रैक्टर-ट्राली से। कई श्रद्धालु अपने साथ टेंट, राशन, बर्तन और पीतल के दीपक लेकर पहुंचे।

मंदाकिनी के दोनों किनारों पर करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में अस्थायी शिविरों की कतारें नजर आईं। तीन दिनों में करीब 24 लाख श्रद्धालुओं के दीपदान करने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार को छह लाख, शनिवार को आठ लाख और रविवार शाम तक करीब 10 लाख श्रद्धालुओं ने दीपदान किया।

राम के वनवास की स्मृतियों से जुड़ी आस्था

मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के 14 वर्षों में से साढ़े 11 वर्ष चित्रकूट में बिताए थे। मंदाकिनी में स्नान और यहां तपस्या की स्मृतियां श्रद्धालुओं की आस्था को विशेष महत्व देती हैं। इसी विश्वास के साथ भक्त नदी में दीप प्रवाहित कर प्रभु के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हैं। वाल्मीकि आश्रम के महंत भरतदास के अनुसार, चित्रकूट की दीपमालिका त्रेता युग की परंपरा से जुड़ी है। मान्यता है कि वनवास काल में माता सीता ने अमावस्या की रात दीप जलाकर चित्रकूट को आलोकित किया था।

सजावट और सुरक्षा के रहे विशेष इंतजाम

श्री चित्रकूटधाम तीर्थ विकास परिषद की ओर से स्टेशन से रामघाट तक मार्ग को सजाया गया। एलईडी तोरण द्वार और सांस्कृतिक मंचों पर बुंदेली कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। डीआइजी राजेश एस, डीएम पुलकित और एसपी अरुण कुमार सिंह ने मेला व्यवस्था का निरीक्षण किया। वन-वे यातायात व्यवस्था, 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन, मेटल डिटेक्टर, जल पुलिस और खुफिया टीमों के माध्यम से निगरानी की गई। मध्य प्रदेश की ओर भी मोहकमगढ़ प्रवेश द्वार और अक्षय वट के पास बने तोरण द्वार रोशनी से जगमगाते रहे। हनुमानधारा और कामदगिरि के वर्चुअल रियलिटी दर्शन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने। वहां 120 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी की गई।

आज भी होगा दीपदान, शुरू होगा गधा मेला

अमावस्या दो दिन होने के कारण मंगलवार को भी श्रद्धालु मंदाकिनी में स्नान और दीपदान करेंगे। परीवा पर भरत मिलाप मंदिर परिसर में बुंदेलखंड की दीवारी नृत्य टोलियां अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। इसी के साथ प्रसिद्ध गधा मेला भी शुरू होगा।

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