एक लोकप्रिय DM ने अचानक ले ली विदाई, पीछे छोड़ गईं हजारों सवाल
आईएएस दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है, जिससे सभी हैरान हैं। मिर्जापुर और देवरिया में डीएम ...और पढ़ें
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दिव्या मित्तल। फोटो- इंटरनेट मीडिया
HighLights
आईएएस दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से दिया इस्तीफा।
मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में रहीं।
भविष्य में शिक्षण, लेखन या समाज सेवा की संभावना।
डिजिटल डेस्क, जागरण, देवरिया। उत्तर प्रदेश कैडर की बेहद चर्चित और लोकप्रिय आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से अचानक इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल वर्तमान में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं। उन्होंने अपने 13 साल के कार्यकाल को अविस्मरणीय बताते हुए सोशल मीडिया के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा की। हालांकि, शासन स्तर पर उनका इस्तीफा अभी औपचारिक रूप से मंजूर होना बाकी है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और देवरिया जिलों में जिलाधिकारी (डीएम) के रूप में तैनात रहीं दिव्या मित्तल अपनी जमीनी कार्यशैली और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया, इसका स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। उन्होंने केवल इतना कहा है कि वह सही समय आने पर अपनी भावी योजनाओं का खुलासा करेंगी।
जनहित की मिसालें
दिव्या मित्तल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में मिर्जापुर के दूरदराज पहाड़ी गांव लहुरीडीह तक पाइपलाइन के जरिए पीने का पानी पहुंचाना शामिल है। वर्षों से पानी की किल्लत झेल रहे इस गांव में जब पहली बार नल से पानी पहुंचा, तो एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होकर उन्हें आशीर्वाद दिया था—जिसका जिक्र उन्होंने अपने विदाई संदेश में भी किया है।
इसके अलावा, देवरिया में उन्होंने 'मेरा गांव, मेरा गौरव' नाम से एक अनूठी पहल शुरू की थी। इस व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जिले के 800 से अधिक ग्राम प्रधानों को सीधे प्रशासनिक अधिकारियों से जोड़ा गया था, जिससे ग्रामीण समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पाता था।

विवाद और नेताओं से अनबन की भी रहीं चर्चाएं
अपनी सख्त कार्यशैली और स्वतंत्र फैसलों के कारण दिव्या मित्तल का कार्यकाल विवादों से भी अछूता नहीं रहा। लहुरीडीह जल परियोजना के उद्घाटन पर की गई जल पूजा के दौरान स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक तूल पकड़ा था। आलोचकों ने उन पर नेताओं को दरकिनार करने का आरोप लगाया, जिसके बाद उनका मिर्जापुर से तबादला कर दिया गया था।
वहीं संत कबीर नगर में डीएम रहने के दौरान निर्देशों की अनदेखी पर प्रभारी मंत्री आशीष पटेल से उनके मतभेद काफी चर्चित रहे थे। देवरिया में सोशल मीडिया पर सरकारी कामकाज के अत्यधिक प्रचार-प्रसार के कारण विरोधियों ने उन्हें 'रील वाली डीएम' कहना शुरू कर दिया था, हालांकि उनके समर्थकों का मानना था कि इससे प्रशासन जनता के अधिक करीब आया।
IIT, IIM और लंदन से IAS तक का सफर
हरियाणा के रेवाड़ी में जन्मी और दिल्ली में पली-बढ़ीं दिव्या मित्तल की शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि बेहद शानदार रही है। उन्होंने आईआईटी (IIT) दिल्ली से बी.टेक और आईआईएम (IIM) बैंगलोर से मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में प्रतिष्ठित निवेश बैंक 'जेपीमॉर्गन' (JPMorgan) में काम किया। उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों (जो आईआईटी/आईआईएम में उनके सीनियर थे) ने भी लंदन में 'सिटीग्रुप' में सेवाएं दीं। 2009 में यह दंपत्ति देश सेवा के उद्देश्य से भारत लौटा। गगनदीप 2011 में भारतीय व्यापार सेवा (ITS) में शामिल हुए, जबकि दिव्या ने 2013 में आईएएस परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
आगे क्या? राजनीति या समाज सेवा?
दिव्या मित्तल के अचानक इस्तीफे के बाद उनके अगले कदम को लेकर कयासों का दौर गर्म है। दिव्या मित्तल 'द क्राफ्टेड जीनियस' पुस्तक की लेखिका हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह शिक्षण, लेखन, भावनात्मक स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में काम कर सकती हैं।
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वहीं राजनीतिक गलियारों में कुछ और ही चर्चा का विषय बना हुआ है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों को देखते हुए मिर्जापुर और आसपास के इलाकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि वे राजनीति में कदम रख सकती हैं। कई स्थानीय ग्रामीण प्रतिनिधियों ने तो उनके चुनाव लड़ने पर समर्थन देने की बात भी कही है। हालांकि, दिव्या मित्तल ने खुद राजनीति में जाने के संकेत नहीं दिए हैं।
दिव्या ने अपने विदाई संदेश के अंत में उन्होंने लिखा है कि पद चला गया होगा, लेकिन इस देश की मिट्टी से मुझे जो प्यार मिला है, वह मुझे कभी नहीं छोड़ेगा।
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