गाजियाबाद में बुजुर्ग को 8 घंटे रखा डिजिटल अरेस्ट, फर्जी जज बनकर फंसाया और ठग लिए 2 करोड़ से अधिक
गाजियाबाद में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 84 वर्षीय सेवानिवृत्त बुजुर्ग से साइबर ठगों ने 2.19 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलि ...और पढ़ें

बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्त रख ठगे दो करोड़ से अधिक रुपये।
HighLights
गाजियाबाद में 84 वर्षीय बुजुर्ग से 2.19 करोड़ की ठगी।
साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट, ईडी अधिकारी बनकर डराया।
पांच अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराए गए रुपये।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठगों ने रामप्रस्थ कॉलोनी निवासी 84 वर्षीय सेवानिवृत्त बुजुर्ग से 2.19 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली।
ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का डर दिखाकर वीडियो कॉल पर 8 घंटे डिजिटल अरेस्ट करके रखा। एक ठग ने खुद को न्यायाधीश बताकर पीड़ित को जेल जाने का डर दिखाकर डराया। करीब एक माह तक कॉल कर बुजुर्ग काे मानसिक दबाव में रखा।
वहीं, जांच और सत्यापन के नाम पर पांच अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई गई। साइबर थाना पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
6.8 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ
रामप्रस्थ कॉलोनी निवासी राम प्रकाश हुर्रिया ने शिकायत में बताया कि 22 मई 2026 को उन्हें वॉट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने अपना नाम विजय खन्ना बताते हुए खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। केनरा बैंक के एक खाते से 6.8 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।
खुद को ईडी अधिकारी बताया
उन्हें निर्देश दिया गया कि वह इस मामले को पूरी तरह गोपनीय रखें। जांच में सहयोग करें। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। अगले दिन 23 मई को वॉट्सएप पर वीडियो कॉल के जरिए एक व्यक्ति ने अपना नाम रोहित गुप्ता बताते हुए खुद को ईडी अधिकारी बताया। उसने करीब 8 घंटे तक लगातार वीडियो कॉल पर बात की और एक महिला को न्यायाधीश नागराजन बताकर बातचीत कराई।
दूसरे नंबर से लगातार संपर्क करता रहा
कथित न्यायाधीश ने कहा कि जमानत मिलने से पहले उनके सभी बैंक खातों और संपत्तियों की जांच होगी। उन्हें अस्थायी रूप से हिरासत में लिया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद पूरी धनराशि वापस कर दी जाएगी। राहुल गुप्ता नामक व्यक्ति भी दूसरे नंबर से लगातार संपर्क करता रहा।
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शिकायत के अनुसार, 19 जून की दोपहर तक ठग उनसे लगातार बातचीत करते रहे और उन्हें विश्वास दिलाते रहे कि जांच पूरी होने के बाद उनका पैसा लौटा दिया जाएगा। डर की वजह से पीड़ित ने घर के किसी अन्य सदस्य को ठगी के बारे में नहीं बताया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने परिवार के अन्य सदस्य को बताया।
जांच और सत्यापन के नाम पर पांच खातों में जमा कराए रुपये
ठगों के झांसे में आकर पीड़ित ने 26 मई से चार जून के बीच पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 2.19 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में जमा कर दिए। 26 मई को सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के खाते से 52.76 लाख रुपये आईसीआईसीआई बैंक आलमबाग लखनऊ स्थित खाते में ट्रांसफर किए गए।
इसके बाद 27 मई को एक्सिस बैंक खाते से 44.96 लाख रुपये आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के चेन्नई स्थित खाते में भेजे गए। 30 मई को 17 लाख रुपये बंधन बैंक, साल्ट लेक सिटी कोलकाता के खाते में ट्रांसफर किए गए। तीन जून को 55 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के खाते में और चार जून को 50 लाख रुपये फिर एक अन्य इंडसइंड बैंक खाते में भेजे गए।
इस प्रकार कुल 2.19 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगों के बताए खातों में जमा कराई गई। साइबर थाना पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
कॉल उठाना बंद किया तो हुआ ठगी का एहसास
पीड़ित ने बताया कि ठग लगातार उन्हें भरोसा दिलाते रहे कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। जब उन्होंने हाल में संपर्क करने का प्रयास किया तो आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया। उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है।
उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर धनराशि वापस दिलाने और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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पिछले एक वर्ष में हुए डिजिटल अरेस्ट के प्रमुख मामले
- मई 2025 में वैशाली की 55 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका को 28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 56 लाख रुपये ठग लिए गए।
- सितंबर 2025 में 73 वर्षीय सेवानिवृत्त रक्षा मंत्रालय अधिकारी से 15 दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 34.9 लाख रुपये की ठगी की गई।
- सितंबर 2025 में गाजियाबाद के एक बुजुर्ग दंपती से मनी लान्ड्रिंग मामले में फंसाने का डर दिखाकर करीब 20 लाख रुपये ठग लिए गए।
- वर्ष 2025 में गाजियाबाद में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों में पीड़ितों को लगभग 7.9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।