यूपी में पहली बार जननी सुरक्षा योजना को लगा बड़ा झटका, प्रसव के बाद भी नहीं मिला अनुदान; चौंका देंगे आंकड़े
जननी सुरक्षा योजना के तहत उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख संस्थागत प्रसव के बावजूद किसी भी महिला लाभार्थी को अनुदान नहीं मिला है। ...और पढ़ें
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जननी सुरक्षा योजना को पहली बार कड़ा झटका लगा। एआई जनरेटेड

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मदन पांचाल, गाजियाबाद। मातृ-शिशु सुरक्षा को लेकर संचालित कल्याणकारी योजनाओं की हालत पतली हो रही है। उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने को लागू जननी सुरक्षा योजना को पहली बार कड़ा झटका लगा है।
प्रदेश स्तर से जारी की गई एक अप्रैल से 13 मई तक की रिपोर्ट में पता चला है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हुए 1.84 लाख संस्थागत प्रसव के सापेक्ष एक भी महिला लाभार्थी को जननी सुरक्षा योजना का अनुदान नहीं मिला है। इतना ही नहीं 8014 महिलाओं के भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण भी की गई लेकिन किसी के खाते में पैसा नहीं पहुंचा।
सबसे अधिक प्रसव मेरठ मंडल में दर्शाए गए
अब प्रदेश स्तर से इस संबंध में आ रही परेशानियों एवं तकनीकी समस्याओं के समाधान को वित्त विभाग के अधिकारियों ने प्रयास तेज कर दिए हैं। सबसे अधिक प्रसव मेरठ मंडल में दर्शाए गए हैं।
संस्थागत प्रसव कराने पर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये का अनुदान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, 22 करोड़ से अधिक का अनुदान अटकने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तनाव बढ़ गया है।
- 1,76,258 लाभार्थियों के जेएसवाई भुगतान के विभिन्न स्तर पर लंबित होने की रिपोर्ट
- 682 लाभार्थियों का पिन सत्यापन स्टाफ नर्स एवं एएनएम स्तर पर लंबित है
- 72,154 लाभार्थियों का जेएसवाई सत्यापन नोडल,लेखाधिकारी एवं प्रभारी स्तर पर लंबित है
- 1,03,419 लाभार्थियों का एमओआइसी स्तर पर अप्रूवल लंबित हैं
जननी सुरक्षा योजना के अनुदान भुगतान प्रक्रिया पूरी होने पर लंबित वाले कुछ जिलों के नाम
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जनपद कुल प्रसव प्रक्रिया पूरे होने पर लंबित भुगतान
| क्र० सं० | जनपद | कुल | लंबित भुगतान |
|---|---|---|---|
| 1 | गाजियाबाद | 1,723 | 1,723 |
| 2 | मेरठ | 2,119 | 2,119 |
| 3 | गौतमबुद्ध नगर | 1,580 | 1,473 |
| 4 | बदायूं | 4,667 | 3,669 |
| 5 | बरेली | 3,175 | 2,671 |
| 6 | आगरा | 3,690 | 3,488 |
| 7 | वाराणसी | 3,346 | 3,168 |
| 8 | बाराबंकी | 3,621 | 3,480 |
| 9 | बागपत | 1,097 | 1,062 |
| 10 | प्रयागराज | 5,612 | 5,433 |
| 11 | बुलंदशहर | 2,818 | 2,753 |
| 12 | रायबरेली | 3,088 | 3,017 |
| 13 | सीतापुर | 6,512 | 6,415 |
| 14 | गोरखपुर | 3,565 | 3,546 |
| 15 | लखनऊ | 4,436 | 4,431 |
| 16 | कानपुर देहात | 1,400 | 1,399 |
| 17 | अलीगढ़ | 4,093 | 4,093 |
| 18 | बहराइच | 5,196 | 5,196 |
| 19 | कानपुर नगर | 3,089 | 3,089 |
| 20 | हरदोई | 4,550 | 4,550 |
| 21 | लखीमपुर खीरी | 4,657 | 4,657 |
| 22 | मुजफ्फरनगर | 1,970 | 1,970 |
| 23 | सहारनपुर | 2,653 | 2,653 |
| 24 | गाजीपुर | 3,314 | 3,314 |
| 25 | जौनपुर | 2,981 | 2,981 |
मंत्र एप से संस्थागत प्रसव वेरिफाई करते हुए जेएसवाई लाभार्थियों के भुगतान में कोई भी समस्या नहीं। एपीआई एसएनए स्पर्श प्लेटफार्म और फेम एसएनए जिस स्टेप से प्रारम्भ हो रहा है वहां पर कुछ टेक्निकल समस्या है। इसका निस्तारण दोनों के मर्ज होने पर शासन स्तर से ही संभव है। स्थानीय स्तर पर पंजीकरण, पिन सत्यापन एवं अप्रूवल में कोई देरी नहीं हो रही है। - डॉ. अमित विक्रम, कार्यवाहक सीएमओ
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