रेलवे में संरक्षा व सुरक्षा से खिलवाड़, अफसर करा रहे ट्रैकमैनों से बेगार, बोर्ड ने लिया संज्ञान
भारतीय रेलवे में संरक्षा और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। शिकायत है कि ट्रैकमैन जैसे संरक्षा कर्मियों को निजी कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे ट्रै ...और पढ़ें

प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। भारतीय रेलवे में संरक्षा और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजी गई शिकायत में दावा किया गया है कि ट्रैकमेंटेनर (ट्रैकमैन) व पेट्रोलिंग जैसे संरक्षा से जुड़े रेलवे कर्मचारियों को उनके मूल दायित्वों से हटाकर घरेलू कार्य, वाहन संचालन और अन्य निजी कामों में लगाया जा रहा है।
फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ट्रैक निरीक्षण, सिग्नलिंग और अन्य संरक्षा व सुरक्षा से जुड़े कार्य प्रभावित होने से यात्रियों की जान भी जोखिम में पड़ रही है। यह सब अधिकारियों के दबाव में हो रहा है।
केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) पोर्टल पर प्रधानमंत्री को संबोधित शिकायती पत्र पर रेलवे बोर्ड ने संज्ञान लिया है। रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक/संरक्षा (सिविल) राहुल श्रीवास्तव ने भारतीय रेलवे के सभी जोनल महाप्रबंधकों को शिकायती पत्र की प्रति भेजते हुए इस संबंध में अपने स्तर पर जांच कराने तथा कृत कार्रवाई से अवगत कराने को कहा है।
बोर्ड निदेशक का कहना है कि रेल हादसों और सामने आ रही लापरवाहियों के बीच आई इस शिकायत ने रेलवे तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शिकायत मिली है कि छोटे हादसों जैसे ट्रैक फेलियर, सिग्नल गड़बड़ी और पेट्रोलिंग स्टाफ की मौत को अक्सर दबा दिया जाता है। केवल बड़े हादसे ही सामने आते हैं, जिससे असल स्थिति छिपी रहती है।
गंभीर बात यह है कि रिकार्ड में हेरफेर कर कर्मचारियों को ऑफिस ड्यूटी या स्पेशल ड्यूटी में दिखा दिया जाता है, जबकि वास्तव में उनसे अलग काम कराया जाता है। हादसों के बाद जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। पहले से निष्कर्ष तय कर लिए जाते हैं और बाद में समिति बनाकर खानापूर्ति कर दी जाती है।
हर बार निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, जबकि उच्च अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती। रेलवे बोर्ड की इस चिट्ठी से रेलवे अधिकारियों में हलचल मच गई है।
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