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कानपुर: तीन साल में खपाई 10.80 लाख बोरी नकली सीमेंट, भाजपा नेता पर संरक्षण का आरोप

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 17 Oct 2026 12:43 AM (IST)Updated: Sat, 17 Oct 2026 02:06 AM (IST)

कानपुर में नकली सीमेंट बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है, जहां तीन साल में 10.80 लाख बोरी नकली सीमेंट ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. कानपुर में नकली सीमेंट फैक्ट्री का बड़ा खुलासा।

  2. तीन साल में 10.80 लाख बोरी नकली सीमेंट बेची।

  3. भाजपा नेता पर संरक्षण का गंभीर आरोप लगा।

जागरण संवादाता, कानपुर। एसीसी और अंबुजा सीमेंट के नाम पर नकली सीमेंट बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश होने के बाद हर दिन नया राजफाश हो रहा है। हर माह 30 हजार बोरी की खेप खपाने के हिसाब से तीन साल में आरोपितों ने कानपुर व आसपास जिलों के साथ पूरे प्रदेश में 10.80 लाख बोरी नकली सीमेंट खपाई।

इसका प्रयोग बड़ी इमारतों को बनाने, सीएम ग्रिड की सड़कों व लखनऊ में एयरपोर्ट निर्माण समेत अन्य जगह किया गया। तीन साल से आरोपितों के पास अदाणी ग्रुप की एसीसी व अंबुजा सीमेंट कंपनी की डीलरशिप थी। चर्चा है कि इस गिरोह को संरक्षण भाजपा के एक बड़े नेता देते थे।

हालांकि, अभी उनका नाम सामने नहीं आया है। फरार फैक्ट्री संचालक भाइयों की गिरफ्तारी बाद नाम सामने आ सकता है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने इंस्पेक्टर दिनेश सिंह बिष्ट को दोनों की गिरफ्तारी के लिए चार दिन का अल्टीमेटम दिया है।

दोनों साझेदार हैं फरार

अदाणी ग्रुप के कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक की शिकायत पर पुलिस ने पनकी के इस्पात नगर स्थित फैक्ट्री में छापा मारकर एसीसी व अंबुजा कंपनी के नाम की नकली सीमेंट बनाकर सप्लाई करने का राजफाश बुधवार को किया था। वहां से एक मुंशी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। आरोपित फैक्ट्री संचालक भाई नीरज गुप्ता व धीरज गुप्ता के साथ इनके दोनों साझेदार फरार हैं।

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छापेमारी में फैक्ट्री से 1000 से अधिक नकली सीमेंट से भरी व 3000 से अधिक खाली बोरियां बरामद हुईं। पुलिस अब पता लगा रही है कि गिरोह ने कहां-कहां व किस ठेकेदार के जरिए नकली सीमेंट सप्लाई कराई है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि प्राथमिक जांच में नीरज व धीरज को तीन साल पहले प्रति माह पांच टन माल बिक्री के लिए डीलरशिप मिली थी। उसकी ही आड़ में वह नकली सीमेंट बनाकर बेचने लगे।