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    कानपुर किडनी कांड: गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेने में देरी, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 06:00 AM (IST)

    कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच छह दिन से जारी है, जिसमें आठ लोग गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस अभी तक मुख्य सरगना तक नहीं पहुंच पाई है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, कानपुर। किडनी खरीद-बिक्री कर अवैध ढंग से ट्रांसप्लांट करने के प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई और जांच को छह दिन हो चुके हैं। अब तक आठ लोग गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। कुछ सफेदपोश डॉक्टरों के इस काले कारनामों के पीछे काम कर रहे गिरोह का छोर कहां से कहां तक है, यह पुलिस जांच में अभी तक पहेली है।

    आश्चर्यजनक यह है कि आरोपित डॉक्टर दंपती समेत जिन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, उनका पुलिस रिमांड अब तक नहीं हो सका है। कहा जा रहा है कि सोमवार को पुलिस अदालत में दलाल शिवम के रिमांड की अर्जी देगी।

    इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग की खामोशी और आरोपितों का रसूख सवालों के घेरे में है। बेगूसराय के आयुष की किडनी खरीद कर अवैध रूप से मुजफ्फरनगर की पारुल को ट्रांसप्लांट की गई है। पैसों के भुगतान में उपजे विवाद से 30 मार्च को किडनी कांड का राज खुला था।

    एक आरोपित से पूछताछ में दिसंबर 2025 में किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान महिला की मौत की बात पता चलने पर पुलिस ने शनिवार को मेडीलाइफ अस्पताल के संचालक कन्नौज निवासी रोहन व औरैया के नरेंद्र को हिरासत में लिया है, जबकि कानपुर से देर रात स्वयं को डॉक्टर बताने, जबकि केवल बीए पास होने वाले व्यक्ति को उठाया गया है।

    वर्तमान में उसका लखनऊ में अस्पताल है। पुलिस अब उससे कई राज पाने की उम्मीद लगाए है। दिसंबर में हुए ट्रांसप्लांट को लेकर दलाल शिवम अग्रवाल की अन्य लोगों से मोबाइल फोन पर बात की रिकॉर्डिंग से प्रकरण से जुड़ी कहानी में रोज नए-नए किरदार सामने आ रहे हैं। रिकॉर्डिंग में प्रयागराज के नवीन पांडेय और साहिल (पता अभी अस्पष्ट) के नाम अब पुलिस के लिए नई खोज का विषय हैं।

    आयुष को राजी करने वाले एंबुलेंस चालक दलाल शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से मिली रिकार्डिंग में शिवम से नवीन कह रहा है- तुमको पता है कि तुम्हारा नाम लेकर साहिल ने एक मरीज से 22 लाख ले लिए हैं। इस पर शिवम कहता है- उसे नहीं पता कि शिवम और रोहित क्या चीज हैं।

    ऐसे करोड़ों रुपये हम दे सकते हैं....। पता चला है कि नवीन लगभग पांच साल से आरोपित गाजियाबाद के डॉ. रोहित से जुड़ा था। रोहन को हिरासत में लेने के बाद पुलिस मेडीलाइफ अस्पताल के एक और साझीदार कन्नौज के संदीप की तलाश कर रही है।

    औरैया में पुलिस ने शनिवार को कई अस्पतालों की जांच की है। जांच में सामने आया है कि टेलीग्राम ग्रुप में 643 लोगों को जोड़कर खुद को डॉक्टर बताने वाले ऑपरेशन थिएटर के मैनेजर-इंचार्ज व कर्मी अस्पताल संचालकों व दूसरे डॉक्टरों की मिलीभगत से यह काम कर रहे थे।

    इधर, डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के अनुसार पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डाक्टरों ने नहीं, बल्कि ओटी टेक्नीशियन की टीम ने किया था। इसमें गाजियाबाद के शांति गोपाल हॉस्पिटल के ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह व नोएडा के सर्वोदय हॉस्पिटल के ओटी मैनेजर राजेश, दिल्ली के उत्तम नगर निवासी ओटी मैनेजर मुद्दसर अली सिद्दीकी उर्फ अली समेत पांच लोग शामिल थे।

    आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत कुमार आहूजा, उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा समेत आठ आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। जांच में पता चला कि पारुल व आयुष को मेरठ के डॉ. अफजाल अहमद के कहने पर कार चालक परवेज आहूजा अस्पताल में लेकर आया था।

    परवेज को ट्रैवल एजेंसी संचालक अंकित ने अफजाल के कहने पर भेजा था। इससे पहले भी वह डॉ. अफजाल को तीन बार आहूजा व मेडीलाइफ अस्पताल लाया था। पुलिस की आठ टीमें डॉ. अफजाल, डॉ. रोहित, डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अमित कुमार समेत गिरोह के सदस्यों की तलाश कर रही हैं।

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