कानपुर के व्यापारियों को पुराने टैक्स बकाया पर मिलेगी बड़ी राहत, पूरा ब्याज और अर्थदंड माफ, 3 महीने का मौका
उत्तर प्रदेश सरकार ने 'ब्याज माफी योजना-2026' लागू की है, जिससे कानपुर के लगभग 50 हजार कारोबारियों को पुराने कर ...और पढ़ें

यह फोटो एआई जनरेटेड है।
HighLights
पुराने कर बकायों पर 50-100% ब्याज माफी
कानपुर के 50 हजार कारोबारियों को मिलेगा लाभ
ऑनलाइन आवेदन कर 3 महीने में उठाएं योजना का लाभ
जागरण संवाददाता, कानपुर। वर्षों से पुराने कर बकाये, भारी ब्याज और अर्थदंड के बोझ से जूझ रहे कानपुर के करीब 50 हजार व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश सरकार ने ब्याज माफी योजना-2026 लागू कर दी है। इसके तहत 31 दिसंबर 2025 तक के निर्धारित कर बकायों पर ब्याज में 50 से 100 प्रतिशत तक छूट मिलेगी। समय पर कर जमा नहीं करने के कारण लगाए गए अर्थदंड को भी पूरी तरह माफ करने का प्रविधान किया गया है। योजना से वाणिज्य कर और वैट के पुराने मामलों के निपटारे का रास्ता खुलेगा।
योजना से संबंधी अधिसूचना प्रदेश सरकार ने एक दिन पहले जारी की है। इसके तहत व्यापारियों को मूल कर बकाये की पूरी धनराशि जमा करनी होगी जबकि ब्याज में छूट की सीमा बकाये की राशि के आधार पर तय की गई है। 10 लाख रुपये तक के मूल बकाये पर 100 प्रतिशत ब्याज माफ होगा।
10 लाख से एक करोड़ रुपये तक के बकाये पर 10 प्रतिशत ब्याज जमा करना होगा। इसी तरह एक से पांच करोड़ रुपये तक के बकाये पर 25 प्रतिशत ब्याज जमा करने पर 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। पांच करोड़ रुपये से अधिक के बकाये पर 50 प्रतिशत ब्याज जमा करना होगा और शेष 50 प्रतिशत माफ होगा।
जीएसटी मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट संतोष गुप्ता के अनुसार योजना से कानपुर और आस - पास के क्षेत्रों में लगभग 50 हजार करोबारियों को लाभ मिलेगा। इसके तहत उत्तर प्रदेश बिक्री कर अधिनियम, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, व्यापार कर अधिनियम और मूल्य संवर्धित कर (वैट) अधिनियम समेत विभिन्न पुराने कर कानूनों के लंबित बकाये निपटाए जा सकेंगे। न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटारे का विकल्प भी दिया गया है।
आनलाइन आवेदन, 15 दिन में जारी होगा प्रमाणपत्र
सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार योजना अधिसूचना जारी होने की तिथि से तीन माह तक प्रभावी रहेगी। जरूरत पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। व्यापारियों को विभागीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा और निर्धारित धनराशि जमा करनी होगी। आवेदन मिलने के 15 दिन के भीतर संबंधित कर निर्धारण अधिकारी को जांच पूरी कर बकाया चुकता होने का प्रमाणपत्र जारी करना होगा। व्यापारियों की सुविधा के लिए जिलों में हेल्प डेस्क भी बनेंगी।
