कानपुर देहात में चपरघटा पावर प्लांट घोटाले की जांच तेज, एसआइटी जुटाएगी दस्तावेज
चपरघटा पावर प्लांट घोटाले की जांच अब तेज हो गई है, जिसमें पांच सदस्यीय एसआईटी बैंकों और किसानों से दस्तावेज जुटाने की तैयारी कर रही है। ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, कानपुर देहात। चपरघटा में कथित पावर प्लांट घोटाले की जांच अब तेज होने जा रही है। मामले की जांच कर रही पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआइटी) बैंकों से लेकर किसानों तक से दस्तावेज जुटाने की तैयारी में है।
जिन बैंकों ने संबंधित कंपनियों को ऋण दिया था, उनसे ई-मेल के माध्यम से अभिलेख मांगे जाएंगे। जांच एजेंसियों का मानना है कि दस्तावेज सामने आने के बाद मामले की कई अहम परतें खुल सकती हैं और वित्तीय लेनदेन से लेकर भूमि संबंधी प्रक्रियाओं तक की स्थिति स्पष्ट होगी।
चपरघटा क्षेत्र में वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी लैंको अनपरा पावर लिमिटेड ने करीब 2332 एकड़ जमीन के आधार पर लगभग 1500 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
आरोप है कि परियोजना शुरू ही नहीं हुई और बाद में कंपनियों ने स्वयं को दिवालिया घोषित कर दिया। आरोप यह भी हैं कि करीब 400 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई, जबकि परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। मामले में शुरू से नियमों की अनदेखी और मिलीभगत की चर्चाएं होती रही, लेकिन उस समय किसी स्तर पर गंभीर जांच नहीं की गई।
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अब गठित एसआइटी पुराने रिकार्ड खंगालने में जुट गई है। जांच टीम जमीन अधिग्रहण, ऋण स्वीकृति, परियोजना प्रक्रिया और बाद में हुई नीलामी से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल करेगी। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान एडीएम कार्यालय के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
एसआइटी यह जानने का प्रयास करेगी कि भूमि अधिग्रहण और वित्तीय प्रक्रियाओं में किन स्तरों पर निर्णय लिए गए और क्या नियमानुसार कार्रवाई की गई थी। किसानों से भी भूमि अधिग्रहण और भुगतान से संबंधित अभिलेख जुटाए जा सकते हैं, ताकि पूरे मामले का तथ्यात्मक परीक्षण हो सके।
अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जांच के बाद यदि किसी स्तर पर अनियमितता या जिम्मेदारी सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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