नौकरी के पीछे भागना छोड़ा, मधुमक्खियों से दोस्ती कर लखपति बना कानपुर देहात का विपिन, मधुमक्खी पालन से संवारा भविष्य
मलासा के अंडवा गांव के विपिन कुमार मधुमक्खी पालन से सालाना 8-10 लाख रुपये कमा रहे हैं। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के सहयोग से उन्होंने 10 लोगों को रोज ...और पढ़ें

अंडवा गांव में लाभार्थी विपिन कुमार से शहद उत्पादन के बारे में जानकारी लेते जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी अखिलेश अग्निहोत्री। सौ. विभाग
HighLights
विपिन मधुमक्खी पालन से सालाना 8-10 लाख कमाते हैं
खादी ग्रामोद्योग विभाग ने प्रशिक्षण और उपकरण दिए
उनके व्यवसाय से 10 लोगों को रोजगार मिला
योगेन्द्र यादव, कानपुर देहात। मधुमक्खियों से दोस्ती मलासा के अंडवा गांव के विपिन के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है। मधुमक्खी पालन कर शहद के व्यवसाय से जुड़कर वह आठ से 10 लाख रुपये की वार्षिक आमदनी कर रहे हैं। उन्हें यह सफलता खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से जुड़ने के बाद मिल सकी है।
लाभार्थी का कहना है कि यह व्यवसाय फूलों पर निर्भर होने के कारण काफी चुनौतीपूर्ण भी होता है। उनके जरिए 10 लोगों को रोजगार भी मिल रहा और उनके काम को देखकर अन्य लोग भी उनके पास काम सीखने को पहुंचते हैं।
शहद व्यवसाय से जुड़े
मलासा ब्लाक के अंडवा गांव निवासी विपिन कुमार शहद व्यवसाय से जुड़कर अपना भविष्य संवार रहे हैं। उनका कहना है यह व्यवसाय कृषि की तरह है मौसम और परिस्थिति अनुकूल मिलने पर अच्छा उत्पादन मिलता है फिलहाल शहद उत्पादन के लिए खास तौर पर नवंबर माह से फरवरी व आंशिक तौर पर मार्च माह भी माना गया है l
छह टन शहद तैयार
विपिन ने बताया कि इन महीनों में 275 डिब्बों की मदद से करीब न्यूनतम छह टन शहद तैयार हो जाता है बाजार में कीमत 80 से 150 रुपये तक है। अच्छी कीमत मिलने पर आठ से 10 लाख से अधिक आमदनी भी हो जाती है। साल भर में उनको चार से पांच लाख तक का फायदा होता है। उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष पहले खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त किया था। साथ ही विभाग से नेट ड्रेस, शहद निकालने की मशीन आदि सामान निश्शुल्क मिला था।
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फूलों वाली फसलों के पास डिब्बे
विपिन कुमार ने बताया कि अधिक से अधिक शहद उत्पादन के लिए फूल वाले स्थान जैसे बाग और बगीचों के अलावा फूलों वाली फसलों के पास डिब्बों को रखना होता है। बड़ी संख्या में डिब्बों को रखना और शहद निकालना एक व्यक्ति के वश की बात नहीं है, इसके लिए आवश्यकतानुसार कुछ लोग लगातार तो कुछ को समय समय पर काम पर लिया जाता है जिससे हमारा काम होता और उन्हें रोजगार मिलता है।
यहां भी ले जाते बाक्स
कई बार हमारे गांव के आसपास फूलों की खेती नहीं होने पर बड़ी मात्रा में मक्का उत्पादन वाले क्षेत्र कन्नौज और चौबेपुर में मधुमक्खियों के बक्से ले जाकर रखते हैं। नवंबर से फरवरी और मार्च के अलावा मधुमक्खियों को जीवित रखना बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने बताया कि कुछ लोग शक्कर खिलाने से शहद की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त करते हैं जो पूरी तरह गलत है, इन्हें जीवित रखने के लिए शक्कर खिलानी पड़ती है क्योंकि मधुमक्खियां नहीं रहेंगी तो शहद कहां से आएगा।
हनी मिशन योजना से उठाया लाभ
वहीं जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी अखिलेश अग्निहोत्री ने बताया कि विपिन कुमार की लगन को देखते हुए आत्मनिर्भर बनाने के लिए हनी मिशन योजना से जोड़ते हुए ग्रामोद्योगी टूल किट वितरण योजना के तहत आठ दिवसीय मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण, नेट ड्रेस व शहद निकालने वाली मशीन आदि निश्शुल्क प्रदान की गई थी। उन्होंने बताया कि लाभार्थी विपिन ने मेहनत और लगन से शहद व्यवसाय में अच्छा प्रदर्शन किया है हमने निरीक्षण कर कार्य कुशलता को देखा बेहतर आमदनी प्राप्त कर आर्थिक रूप से सक्षम बनने के साथ ही जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
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