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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में FIR दर्ज, 8 नामजद-बाकी अज्ञात के खिलाफ मुकदमा

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 09:45 PM (IST)

    श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर अयोध्या में FIR दर्ज की गई है। ...और पढ़ें

    HighLights

    1. राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में FIR दर्ज।

    2. मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर कार्रवाई।

    3. टिन्नू यादव समेत 8 लोगों पर मुकदमा दर्ज।

    जागरण संवाददाता, अयोध्या। दुनिया भर में रामभक्तों की आस्था को आघात पहुंचाने वाले बीते अठारह दिनों से चर्चा का विषय बने राम मंदिर के चढ़ावे में हेरफेर के मामले में गुरुवार को आठ नामजद व अन्य अज्ञात आरोपितों के खिलाफ रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई।

    मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी का मामला तब सामने आया जब सात जून को समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से पांच करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया। इस बयान के बाद अखिलेश यादव ने उसी दिन शाम सात बजे एक्स पर पोस्ट कर चढ़ावे में चोरी प्रकरण पर टिप्पणी की थी।

    सात जून की शाम को ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने स्पष्टीकरण जारी किया। यह मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता रहा और दस जून को प्रधानमंत्री कार्यालय से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई। सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित कर रिपोर्ट मांगी थी।

    सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के चालक रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी की सिफारिश की थी। पुलिस के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306 (मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की क्लर्क या नौकर द्वारा चोरी), 316 (विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 317 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) और 61 (आपराधिक साजिश) के तहत, अन्य दंडात्मक प्रविधानों के साथ दर्ज किया गया है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) भी राम मंदिर में मिले दान में कथित हेराफेरी को लेकर एफआइटार की बढ़ती मांग में शामिल हो गई।

    खबरें और भी

    ये हैं चढ़ावा चोरी के पापी

    अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव

    बीएनएस की इन धाराओं में मुकदमा

    आरोपितों पर एफआईआर में कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें आपराधिक विश्वासभंग, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश और सामूहिक जिम्मेदारी जैसे आरोप हैं। सबसे गंभीर धारा 316(5) मानी जा रही है, जो किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सौंपे गए धन या संपत्ति के गबन/दुरुपयोग से जुड़ी है। इसमें आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रविधान है।

    इसके अलावा 317(4) और 317(5) के तहत चोरी या गबन की संपत्ति को जानबूझकर रखने, छिपाने या उसके निस्तारण में मदद करने का आरोप बनता है। इनमें तीन वर्ष से लेकर सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। धारा 61 आपराधिक साजिश से संबंधित है, यानी यदि कई लोगों ने मिलकर योजना बनाकर अपराध किया है तो यह धारा लागू होती है।

    गंभीर अपराध की साजिश साबित होने पर मुख्य अपराध के बराबर सजा हो सकती है। वहीं धारा 3(5) सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी तय करती है, यानी साझा मंशा से अपराध करने पर सभी आरोपितों पर मुख्य अपराध की जवाबदेही तय होगी।

    अब तक घटनाक्रम

    7 जून

    समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से पांच करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने शाम सात बजे एक्स पर पोस्ट कर चढ़ावे में चोरी प्रकरण पर टिप्पणी की थी। सात जून की शाम को ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने स्पष्टीकरण जारी किया।

    8 जून

    चंपत राय ने आरोपों को खारिज किया। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र इसी दिन देरशाम अयोध्या आए और अगले दिन वापस चले गए।

    9 जून

    भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई या ईडी जैसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।

    10 जून

    प्रधानमंत्री कार्यालय ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की। इसी दिन मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र तत्काल अयोध्या पहुंचे और चार घंटे लंबी बैठक की।

    11 जून

    राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह का एक वीडियो प्रसारित हुआ जिसमें दावा किया कि वे 2021-2022 में उन्होंने चोरी पकड़ी थी, जिसके फुटेज डिलीट कर दिए गए।

    13 जून

    ट्रस्ट के आग्रह पर जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।

    15 जून

    एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और आमंत्रित सदस्य गोपाल राय से जानकारी ली। आठ से 10 कर्मचारियों से करीब छह घंटे पूछताछ।

    16 जून

    टीम ने चंपतराय और गोपाल राय से चार-चार घंटे तक सवाल-जवाब किए। ट्रस्ट के 11 महीने के दस्तावेज खंगाले। चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों से लंबी पूछताछ की।

    17 जून

    जांच टीम ने बैंक अधिकारियों और नोटों की गिनती से जुड़ी निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ की। बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय रिकार्ड की भी पड़ताल की गई।

    18 जून

    टीम 10 घंटे मंदिर परिसर में रही। डॉ. अनिल मिश्रा से चार घंटे तक पूछताछ की। टिटू यादव से डेढ़ घंटे तक पूछताछ की। अनिल-टिटू के जवाब क्रास चेक किए।

    19 जून

    चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्रा और राम मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राय से अलग-अलग पूछताछ हुई। स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक और कैशियर से पूछताछ की।

    20 जून

    टीम ने सभी आरोपियों और संदिग्धों के बैंक खातों की जानकारी इकट्ठा की। सबूत जुटाए। जांच के बाद सारे सबूत अपने साथ लेकर लखनऊ रवाना हो गई।

    23 जून

    एसआईटी ने मंगलवार को 20 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंप दी।

    25 जून

    एफआईआर दर्ज

    एसआईटी की आरंभिक जांच रिपोर्ट में ये संस्तुतियां की गई थीं

    प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए और सभी सदस्यों की समान रूप से जिम्मेदारी तय की जाए। मंदिर ट्रस्ट में किसी प्रशासनिक अधिकारी को सीईओ के रूप में नियुक्त किया जाय।

    विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल को और समय दिया जाए। मंदिर के प्रबंधन के लिए पेशेवर तरीका अपनाने की सलाह। दानराशि की गणना का साप्ताहिक ऑडिट किया जाए। प्रतिदिन चढ़ावा में आने वाली नकदी की इंट्री कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों का पूर्णत: पालन किया जाए। सीसीटीवी कैमरों का डाटा स्टोरेज 45 दिन से बढ़ा कर 180 दिन तक किया जाए

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