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    लखनऊ में गोमती नदी को संवारने के लिए मास्टर प्लान तैयार, ड्रोन सर्वे में मिले 12 नए नाले

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 10:39 PM (IST)

    गोमती नदी को निर्मल बनाने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसमें सीवेज को नदी में जाने से रोकने के लिए नालों की टैपिंग और एसटीपी की क्षमता ब ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

    HighLights

    1. गोमती नदी को निर्मल बनाने का मास्टर प्लान तैयार।

    2. ड्रोन सर्वे में 45 नाले चिह्नित, सीवेज शोधन होगा।

    3. एसटीपी क्षमता बढ़ेगी, नए प्लांट भी लगेंगे।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। गोमती जल को निर्मल बनाने के लिए तेजी से काम चालू करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। गोमती में प्रदूषण रोकने को तैयार मास्टर प्लान तैयार किया गया है। शहर से निकलने वाले सीवेज को सीधे गोमती में पहुंचने से रोकने के लिए नालों की टैपिंग, फ्लो डायवर्जन, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

    ड्रोन सर्वे के बाद गोमती में गिरने वाले 45 नालों की पहचान हुई है। अब इन नालों के जरिए नदी में पहुंच रहे सीवेज का शोधन सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग एसटीपी से जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है। बुधवार के अंक में दैनिक जागरण ने गोमती नदी की दशा और मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अफसरों की लापरवाही को बताया था। इसके बाद ही यह सक्रियता दिखाई दी है।

    राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि नदियों को स्वच्छ बनाना प्राथमिकता है। विभाग ने नए नालों की पहचान की है, जिन्हें जल्द शोधित किया जाएगा। इससे शहर के बड़े हिस्से से गुजरने वाली गोमती नदी का स्वरूप बदलेगा।

    एसटीपी से जोड़कर सीवेज शोधन कराने का प्रस्ताव 

    गोमती नदी करीब 30 किलोमीटर की लंबाई में प्रवाहित होती है। नगर निगम के रिकार्ड में गोमती में गिरने वाले 33 नालों का उल्लेख था। ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नाले चिह्नित किए गए। 45 नालों में से 12 से लगभग 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है। पांच नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। गोमती के पुनरुद्धार के लिए तैयार प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट में नालों को अलग-अलग एसटीपी से जोड़कर सीवेज शोधन कराने का प्रस्ताव है।

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    इसके तहत अवशेष 28 नालों (अनटैप्ड एवं आंशिक टैप्ड) को टैप किए जाने के लिए 160 एमएलडी बसंतकुंज, 65 एमएलडी वजीरगंज, 150 एमएलडी जियामऊ, 65 एमएलडी नीलमथा में एसटीपी निर्माण, मस्तेमऊ नाले पर नेचर बेस्ड तकनीक, पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता के माड्यूलर एसटीपी के माध्यम से शोधन के लिए कार्य योजना चल रही है।

    इसके साथ ही भरवारा एसटीपी के अपग्रेडेशन और उससे जुड़े 19 नालों की आवश्यक मरम्मत और दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन के साथ उससे जुड़े दो नालों की आवश्यक मरम्मत का काम भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।

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    गोमती नदी के समेकित पुनरुद्धार की इस कार्ययोजना की रिपोर्ट छह मई 2026 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) नई दिल्ली को भेजी जा चुकी है। प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन के बाद ओवरफ्लो हो रहे और अनटैप्ड नालों को टैप करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।