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    लखनऊ में मेयर के अधिकार सीज होने पर नगर निगम ने ली विधिक राय; ललित लेंगे पार्षद की शपथ

    Updated: Sun, 24 May 2026 12:15 AM (IST)

    लखनऊ नगर निगम ने महापौर के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश पर विधिक राय ली है। महापौर सुषमा खर्कवाल रविवार को पार्षद ललित ...और पढ़ें

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    मेयर के अधिकार सीज होने पर नगर निगम ने ली विधिक राय।

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। महापौर के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारी सीज किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में नगर निगम ने विधिक राय भी ली है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत सिंह अटल ने अपनी विविध राय में कहा है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में यह उचित है कि याचिकाकर्ता को न्यायालय की तरफ से पारित आदेशों के विधिवत अनुपालन में यथाशीघ्र कानून के अनुसार शपथ दिलाई जाए।

    उसके बाद अनुपालन किए जाने का हलफनामा दाखिल कर न्यायालय के संज्ञान में जाया जाए। हालांकि महापाैर सुषमा खर्कवाल ने कल ही कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश का पूरा सम्मान किया जाएगा और ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाई जाएगी। महापौर शनिवार को कमांड अस्पताल से डिस्चार्ज हो गई हैं और कल रविवार को शपथ दिलाने की बात कही है।

    दरअसल चुनाव न्यायाधिकरण द्वारा फैजुल्लागंज वार्ड (तृतीय) से उपविजेता रहे ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित किए जाने के आदेश के पांच महीने बाद भी शपथ नहीं दिलाने के मामले में 21 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नाराजगी जताई थी।

    वहीं, महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए थे और यहां तक टिप्पणी की थी कि महापौर को अनुपस्थित मानकर नगर निगम के कामकाज को चलाया जाए। कोर्ट ने यहां तक कहा था कि जब तक याची ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिला दी जाती, ये अधिकार सीज रहेंगे। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 29 मई तय की है।

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    यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की पीठ ने याची ललित तिवारी उर्फ ललित किशोर तिवारी की याचिका पर पारित किया था। इससे पूर्व चुनाव न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा था कि निर्वाचित पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचन प्रपत्रों में आवश्यक जानकारी देनी थी जो नहीं दी गई।

    यह कृत्य कदाचार की श्रेणी में आता है जिसके कारण उनका निर्वाचन निरस्त होने योग्य है और उप विजेता ललित किशोर तिवारी को पार्षद निर्वाचित घोषित कर दिया था।

    मामला हाईकोर्ट गया तो पीठ ने कहा था कि यदि एक सप्ताह में शपथ नहीं दिला दी जाती तो महापौर, जिलाधिकारी व नगर आयुक्त उपस्थित होकर इसका स्पष्टीकरण देंगे, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद भाजपा प्रदीप कुमार शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी, लेकिन 20 मई को उनके अधिवक्ता द्वारा याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज हो गई थी।

    बुधवार को सुनवाई के समय कोर्ट ने राज्य सरकार व डीएम की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेशिया व नगर आयुक्त व महापौर की पैरवी कर रहे अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह चौहान से पूछा कि क्या याची को शपथ दिला दी गई है तो उनकी ओर से इन्कार करने पर पीठ ने इस स्थिति पर काफी नाराजगी जताई और महापौर के खिलाफ काफी तीखी टिप्पणियां कीं और उनके वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने का आदेश पारित कर दिया था।

    यह है मामला

    फैजुल्लागंज वार्ड तृतीय में प्रदीप कुमार शुक्ला भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी थे और वादी ललित तिवारी समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े। चुनाव में प्रदीप कुमार शुक्ला को 4972 मत प्राप्त हुए और वादी ललित तिवारी को 3298 मत प्राप्त हुए थे।

    19 दिसंबर 2025 को चुनाव न्यायाधिकरण ने आदेश में कहा था कि प्रदीप कुमार शुक्ला को निर्वाचन प्रपत्रों में आवश्यक जानकारी देनी थी जो नहीं दी गई, यह कृत्य कदाचार की श्रेणी में आता है जिसके कारण उनका निर्वाचन निरस्त होने योग्य है और उपविजेता ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया था।

    राज्य सरकार की तरफ से 19 जनवरी व चार फरवरी 2026 को ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर शपथ ग्रहण कराने के लिए जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र के बाद भी शपथ ग्रहण नही कराए जाने पर ललित तिवारी ने उच्च न्यायालय लखनऊ का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को आदेश दिया था कि महापौर न्यायालय के आदेशों व विधिक प्राविधान को मानने के लिए बाध्य हैं, फिर भी शपथ ग्रहण नहीं कराया गया और न्यायालय में जवाब दाखिल कर दिया गया।

    न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने 11 मई को शपथ ग्रहण कराने व ना कराने पर महापौर व जिलाधिकारी व नगर आयुक्त को 13 मई के लिए व्यक्तिगत तलब किया था और फिर एक सप्ताह का एक सप्ताह का समय शपथ कराने हेतु दिया था और कहा कि अगर महापाैर द्वारा शपथ न कराने पर जिलाधिकारी या मंडलायुक्त को शपथ कराकर शपथपत्र 21 मई को पीठ के समक्ष दाखिल किए जाने का आदेश दिया था।

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