UP: मुन्ना बजरंगी से जुड़ा था अमित सिंह टाटा, डेढ़ वर्ष में ही बदल गया था रंग-ढंग
UP Crime: जाैनपुर से लखनऊ आने के समय अमित सिंह टाटा शुरूआती दौर में सिर्फ स्कार्पियो से चलता था। डेढ़ वर्ष के अंदर ही उसके पास वाहनाें का काफिला हो गया। उसने फार्च्यूनर व स्कार्पियो सहित तीन लग्जरी गाड़ियां खरीदी हैं।

फेंसेडिल कफ सीरप की तस्कर अमित सिंह टाटा
जागरण संवाददाता, लखनऊ: फेंसेडिल कफ सीरप की तस्करी से जुड़ने के बाद अमित सिंह टाटा ने डेढ़ वर्ष में करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर दी थी। कार से चलने वाला टाटा वाहनाें के काफिले के साथ चलने लगा था।
अमित ताे पाश इलाके सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में प्रापर्टी कब्जाने के प्रयास में था, कुछ लोगों ने विरोध करना चाहा तो उसने पूर्व सांसद का करीबी होने का हवाला दिया ताे कोई कुछ बोल नहीं पा रहा है। फिलहाल पुलिस अमित सिंह टाटा के और भी अपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी जुटा रही है।
जाैनपुर से लखनऊ आने के समय अमित सिंह टाटा शुरूआती दौर में सिर्फ स्कार्पियो से चलता था। डेढ़ वर्ष के अंदर ही उसके पास वाहनाें का काफिला हो गया। उसने फार्च्यूनर व स्कार्पियो सहित तीन लग्जरी गाड़ियां खरीदी हैं। इनके काफिले के साथ वह वाराणसी, लखनऊ व जौनपुर में घूमता था। पुलिस के मुताबिक डेढ़ वर्ष में फेंसेडिल कफ सीरप तस्कर शुभम जायसवाल ने ही तीन गाड़ियां टाटा काे खरीदकर दी थी।
अमित सिंह टाटा ने इसी रसूख के चलते सुशांत गोल्फ सिटी में प्रापर्टी कब्जाने का प्रयास किया था, कुछ लोगों ने विरोध करना चाहा तो माफिया से संबंध होने के कारण कोई बोल सका। खास बात यह है कि शुभम ने अमित को इसलिए साथ रखा कि पूर्वांचल के माफिया व दबंग उससे रंगदारी न मांगे। एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया कि शुभम जायसवाल ने और फार्च्यूनर जैसी गाड़ियां गिफ्ट में दी हैं।
दुबई में शुभम जायसवाल के करीबी वरुण सिंह, गौरव जायसवाल, सिगरा के होटल व रियल एस्टेट कारोबारी समेत अन्य कई नाम का खुलासा होना बाकी है। फेंसेडिल कफ सीरप तस्कर शुभम पूर्वांचल के जौनपुर, चंदौली, वाराणसी के कई और रसूखदारों को लाभान्वित कर चुका है। एप्पल के मैकबुक में शुभम ने सभी का काला हिसाब रखा हुआ है। साड़ी, होटल, बालू, कोयला, सरिया समेत अन्य कारोबार में भी शुभम ने कदम बढ़ा दिए थे।
मुन्ना बजरंगी की चिता पर विरोधियों को मिटाने की खाई थी कसम: फेंसेडिल कफ सिरप तस्करी में गिरफ्तार अमित सिंह टाटा पहली बार जेल नहीं गया है। इससे पहले भी जेल जा चुका है। अमित टाटा का नाम मुन्ना बजरंगी से सीधे जुड़ा था। वह उसका खास गुर्गा था। उसकी मौत के बाद अंतिम संस्कार में चिता पर विरोधियों को मिटाने की कसमें खाई थी। जब कोई बड़ा बाहुबली व राजनीतिक ठिकाना नहीं मिला तो वह जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह की शरण में चला गया था।

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