Trending

    loading ads...
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    ...तो इसलिए गर्भवती महिलाओं में बढ़ रहा प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा, नई रिसर्च ने सोचने को किया मजबूर

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 07:00 AM (IST)

    केजीएमयू के शोध के अनुसार, पायरिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में समय से पहले प्रसव का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। मसूड़ों के संक्रमण से बैक्टीरिया प्ले ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    विकास मिश्र, लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक आम, लेकिन अनदेखी समस्या पायरिया (मसूड़ों की गंभीर बीमारी) अब प्री-मैच्योर डिलीवरी (समय से पहले प्रसव) का बड़ा कारण बनकर सामने आ रही है।

    हालिया शोध के मुताबिक, जिन महिलाओं को पायरिया की समस्या होती है, उनमें समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा तीन गुणा तक अधिक होता है। दरअसल, मसूड़ों के संक्रमण से होने वाले बैक्टीरिया रक्त प्रवाह के माध्यम से प्लेसेंटा तक पहुंचकर गर्भावस्था को प्रभावित करते हैं।

    इससे गर्भाशय में संकुचन समय से पहले शुरू हो सकते हैं, जो प्रसव को समय से पहले ट्रिगर कर देते हैं। गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण भी मसूड़ों में सूजन और संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।

    ऐसे में यदि पहले से पायरिया हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। यह शोध केजीएमयू के दंत रोग विभाग में प्रो. डा. अंजनी पाठक ने किया है। अध्ययन में कुल 450 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया।

    क्या है पायरिया और क्यों है खतरनाक
    प्रो. अंजनी पाठक के मुताबिक, पायरिया मसूड़ों का एक संक्रमणजनित रोग है, जिसमें बैक्टीरिया मसूड़ों और दांतों के आसपास सूजन पैदा करते हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है और शरीर में संक्रमण का स्रोत बन जाती है।

    यदि पायरिया गंभीर अवस्था में पहुंच जाए तो यह संक्रमण खून के जरिए शरीर के कई हिस्सों जैसे हार्ट, फेफड़ा और किडनी-लिवर तक पहुंच सकता है। पायरिया मसूड़ों में सूजन, मवाद, और खून आने का कारण बनता है, जो बैक्टीरिया के लिए प्लेसेंटा तक पहुंचने का मार्ग खोलता है और शरीर में सूजन बढ़ने से प्रोस्टाग्लैंडीन नामक रसायन बढ़ जाते हैं, जो समय से पहले प्रसव पीड़ा को प्रेरित कर सकते हैं।

    उन्होंने कहा, पायरिया केवल गर्भावस्था ही नहीं, बल्कि हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य बीमारियों से भी जुड़ा है। इससे स्पष्ट है कि यह एक साइलेंट डिजीज है, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है।

    कैसे किया अध्ययन
    प्रो. अंजनी पाठक ने बताया कि अध्ययन में कुल 450 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया, जिन्हें दो समूहों में बांटा गया। इनमें 150 गर्भवती महिलाओं में पहले पायरिया की गंभीर समस्या थी। इन्हें सामान्य से अलग समूह में रखा गया।

    पायरिया के चलते सभी 150 महिलाओं का प्रसव समय से पहले कराना पड़ा, जबकि अन्य गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी समय पर हुई। गर्भावस्था के तीसरे माह तक पायरिया का संपूर्ण इलाज कराने से प्री-मैच्योर डिलीवरी के खतरे से बचा जा सकता है। यह अध्ययन जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच किया गया है।

    प्री-मैच्योर डिलीवरी से क्या हैं नुकसान
    गर्भावस्था के 37 सप्ताह पूरे होने से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो कभी-कभी जीवनभर असर डाल सकती हैं। ऐसे बच्चों में कम वजन और कमजोर शरीर, सांस लेने में कठिनाई, संक्रमण का अधिक खतरा, मस्तिष्क का विकास प्रभावित, आंखों और कानों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। समय से पहले प्रसव का प्रभाव केवल बच्चे तक सीमित नहीं रहता। मां को भी शारीरिक और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है है।

    प्री-मैच्योर डिलीवरी के अन्य प्रमुख कारण

    -गर्भावस्था के दौरान संक्रमण
    -उच्च रक्तचाप और मधुमेह
    -खराब पोषण
    -तनाव और अनियमित जीवनशैली
    -धूमपान या नशे की आदत

    कैसे करें बचाव

    -गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच
    -संतुलित आहार लें और संक्रमण से बचें
    -तनाव प्रबंधन
    -डाक्टर की सलाह के बिना दवा न लें
    -सुबह और रात दो बार ब्रश करें
    -नियमित रूप से दांतों की जांच कराएं
    -मसूड़ों से खून, सूजन या बदबू को नजरअंदाज न करें