UP में पौने चार लाख ग्रामीण महिलाएं बनीं डेयरी कारोबार की 'बॉस'
उत्तर प्रदेश में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयासों से पौने चार लाख ग्रामीण महिलाएं डेयरी कारोबार में सशक्त हुई ...और पढ़ें

HighLights
पौने चार लाख ग्रामीण महिलाएं डेयरी कारोबार से जुड़ीं।
73 हजार से अधिक महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी'।
डिजिटल डेयरी नेटवर्क से बिचौलियों का हस्तक्षेप खत्म।
डिजिटल टीम, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में योगी सरकार की नीतियों और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के प्रयासों से एक मौन क्रांति आकार ले रही है। प्रदेश के गांवों में करीब पौने चार लाख (3.75 लाख) महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे श्वेतक्रांति की नई ध्वजवाहक बनकर उभरी हैं। दूध के संग्रह से लेकर उसकी गुणवत्ता जांच (फैट टेस्टिंग), डिजिटल हिसाब-किताब और सीधे बैंक खाते में भुगतान तक की कमान अब पूरी तरह इन महिलाओं के हाथों में है।
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे बाजार से जोड़ने के इस मॉडल का असर महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर साफ दिख रहा है। आजीविका मिशन के आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान से जुड़कर अब तक 73 हजार से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं।
डिजिटल डेयरी नेटवर्क: पारदर्शिता और तकनीक का संगम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर तैयार किया गया यह नया डेयरी मॉडल पूरी तरह बिचौलिया मुक्त और पारदर्शी है। प्रदेश के 31 जिलों में फैला यह नेटवर्क प्रतिदिन करीब 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रह कर रहा है। गांवों में स्थापित संग्रह केंद्रों पर दूध पहुंचाने के बाद मोबाइल एप और डिजिटल मशीनों के जरिए दूध की मात्रा, फैट की जांच और कीमत का निर्धारण तुरंत हो जाता है। यह पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहता है, जिससे भुगतान को लेकर कोई असमंजस नहीं रहता।
दुग्ध उत्पादन से होने वाली आमदनी सीधे महिलाओं के हाथ में और उनके बैंक खातों में आने से परिवार के आर्थिक प्रबंधन, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जरूरतों में उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है।
बिचौलियों से मुक्ति और आर्थिक सशक्तीकरण
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन हमेशा से आय का जरिया रहा है, लेकिन दूध की बिक्री और हिसाब-किताब में महिलाओं की भागीदारी सीमित थी। स्थानीय खरीदारों और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण उन्हें दूध की सही कीमत नहीं मिल पाती थी।
उन्होंने आगे कहा कि डेयरी के इस नए डिजिटल मॉडल ने व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। गांव स्तर पर तैयार यह नेटवर्क न केवल महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है। मोबाइल और डिजिटल तकनीक ने ग्रामीण महिला पशुपालकों के लिए कारोबार को आसान बनाया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
