नेपाल में बाढ़ के बाद जिंदगी मलबे में... पर्यटन को 50 अरब से अधिक की चोट
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद हजारों परिवारों का जीवन मलबे में बदल गया है, जिससे आजीविका और पुनर्निर्माण का ...और पढ़ें

नेपाल के नुवाकोट जिले में देवीघाट के पास त्रिशूली नदी के किनारे भारी बारिश के दौरान एक निवासी क्षतिग्रस्त इमारत की बालकनी में खड़ा है। फोटो- PTI
HighLights
बाढ़ ने हजारों घरों, दुकानों और कृषि भूमि को तबाह किया।
हजारों लोग लापता, शवों की पहचान और बचाव कार्य जारी।
पर्यटन क्षेत्र को 50 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान।
विवेक शुक्ला, गोरखपुर। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ का पानी भले ही कई इलाकों से उतरने लगा है, लेकिन तबाही के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। कहीं घर और दुकानें मलबे में तब्दील हो गई हैं तो कहीं कृषि योग्य जमीन पर मिट्टी और पत्थरों की परत जम गई है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सिर्फ सुरक्षित ठिकाने का ही नहीं, बल्कि रोजी-रोटी दोबारा शुरू करने का संकट खड़ा हो गया है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय की तीन सितंबर की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 1252 शव बरामद किए जा चुके थे और करीब 4216 लोग अब भी लापता थे। करीब 11,993 लोगों को बचाया गया था। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है।
मलबे में बदल गई दुकानें, खत्म हो गई कमाई
बाढ़ का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ा है जिनकी रोजी-रोटी छोटे कारोबार, दुकानों और स्थानीय बाजारों पर निर्भर थी। कई स्थानों पर दुकानें और मकान बाढ़ के मलबे में दब गए। सामान बह जाने और बाजारों तक पहुंच बाधित होने से कारोबार ठप है। अब प्रभावित परिवारों के सामने सवाल है कि मलबा हटने के बाद दुकान खुलेगी कैसे और नया सामान आएगा कहां से?
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है। खेतों में मलबा भर जाने से खेती प्रभावित हुई है। जिन किसानों की जमीन बची भी है, वहां अगली फसल की तैयारी आसान नहीं होगी। बाढ़ ने सड़क, पुल और स्थानीय संपर्क व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक सामान पहुंचाना महंगा और मुश्किल हो गया है।

लापता अपनों की तलाश में परिवार
आपदा के बाद सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है जो अब भी अपने लोगों की तलाश में जुटे हैं। काठमांडू में परिजन लापता लोगों की तस्वीरों और पहचान संबंधी जानकारी के जरिए अपनों का सुराग खोज रहे हैं। बरामद शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूने भी लिए जा रहे हैं। तीन सितंबर तक बरामद 1252 शवों में से सिर्फ 95 की पहचान कर उन्हें परिवारों को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई थी।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले बड़ी संख्या में श्रमिक भी लापता बताए गए हैं। राहत और बचाव दल अब भी मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। चार सितंबर को एक हाइड्रोपावर सुरंग से दो श्रमिकों को जिंदा निकाले जाने से राहत कार्य में उम्मीद भी जगी है।
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पर्यटन उद्योग को 50 अरब से ज्यादा का नुकसान
नेपाल की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार पर्यटन पर भी बाढ़ की बड़ी चोट पड़ी है। पर्यटन मंत्री खड़क राज पौडेल के अनुसार, प्रारंभिक अनुमान में पर्यटन क्षेत्र को 50 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बाढ़ से 142 होटल, 57 रेस्तरां और पर्यटन कारोबार से जुड़े 141 वाहन प्रभावित हुए हैं। कई प्रमुख ट्रेकिंग मार्गों को भी नुकसान पहुंचा है।
इसका असर सिर्फ होटल और रेस्तरां तक सीमित नहीं रहेगा। गाइड, टैक्सी चालक, स्थानीय दुकानदार, होटल कर्मचारी और पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारी भी इससे प्रभावित होंगे। सरकार अब प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और पर्यटन गतिविधियों को दोबारा पटरी पर लाने की तैयारी कर रही है।
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अब चुनौती बाढ़ से निकलकर नेपाल को खड़ा करने की
नेपाल के सामने अब राहत और बचाव के साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण की लंबी चुनौती है। घरों और दुकानों को फिर से खड़ा करना, खेतों से मलबा हटाना, सड़क-पुल बहाल करना और पर्यटन क्षेत्र में भरोसा लौटाना आसान नहीं होगा। आपदा ने यह भी दिखाया है कि हिमालयी क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए पहले से बेहतर चेतावनी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत है।
