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    होली पर पसीने छुड़ाएगी धूप? पश्चिम यूपी में 2 हफ्ते तक बारिश की उम्मीद नहीं, किसानों की भी बढ़ी टेंशन

    Updated: Wed, 04 Mar 2026 05:37 AM (IST)

    मेरठ में मार्च का तापमान सामान्य से 4-5 डिग्री अधिक बना हुआ है, लगातार पाँचवें दिन 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। होली पर भी यही स्थिति रहने की संभावन ...और पढ़ें

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    होली पर पसीने छुड़ाएगी धूप? - एआई जनरेटेड तस्वीर

    ओम बाजपेयी, मेरठ। मार्च में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से चार से पांच डिग्री तक अधिक बना हुआ है। मंगलवार को लगातार पांचवें दिन अधिकतम पारा 30 डिग्री से अधिक 30.3 डिग्री सेल्सियस रहा। न्यूनतम तापमान होली पर 16.8 डिग्री रहा।

    आज होली पर भी यही स्थिति रहनी की संभावना है। तेज हवाओं के चलते जरूर मौसम ज्यादा तल्ख नहीं है। मंगलवार को भी तेज धूल भरी हवाएं चलती रहीं। आने वाले दिनो में तापमान 34 से 35 डिग्री तक पहुंच सकता है।

    दिन मेंं गर्म कपड़ों की आवश्यकता नहीं रह गई है, रात में हल्के रफ्तार से पंखे चलाने की जरूरत महसूस होने लगी है।

    मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी कम हुई है। इसके कारण पहाड़ों से आ रही हवाएं मैदानी इलाकों का तापमान कम करने में सफल नहीं हो रही है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री से अधिक बना हुआ है।

    मैदानों में ही नहीं श्रीनगर, मसूरी, मनाली जैसे हिल स्टेशनों पर तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है।
    सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के मौसम केंद्र के प्रभारी डा. यूपी शाही ने बताया कि दो फरवरी को एक पश्चिम विक्षोभ सक्रिय हुआ है और चार मार्च को भी एक और पश्चिम विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है।

    जिसके चलते होली पर तेज धूप निकलेगी। होली के बाद तापमान में और वृद्धि होगी। गत वर्ष की तुलना में इस बार तापमान जल्दी बढ़ा है। पिछले वर्ष 30 से अधिक लगातार तापमान 10 मार्च के के बाद बढ़ा था।

    दो सप्ताह तक बरसात की संभावना नहीं
    फरवरी मेंं इस बार एक-दो दिन ही बरसात हुई है। माह में औसत बरसात 32 मिलीमीटर है। इस बार केवल 2.1 मिलीमीटर बरसात हुई है। फरवरी में बरसात पश्चिम विक्षोभ के कारण होती है। कमजोर पश्चिम विक्षोभ के कारण ही इस बार बरसात नहीं हुई है। मार्च में भी ऐसी स्थिति बनी रहने की संभावना है। 17-18 मार्च तक बरसात के कोई आसार नहीं है।

    टर्मिनल हीट स्ट्रेस से गेहूं का उत्पादन प्रभावित होने का अंदेशा
    मार्च में गेहूं की फसल में दानों का पोषण होता है। कृषि प्रणाली संस्थान के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डा. एम शमीम ने बताया कि अगर इस समय तापमान 30 से 35 डिग्री होता है यह प्रक्रिया कमजोर हो जाती है। दानों का आकार छोटा और वजन कम रह जाता है।

    बीते फरवरी में भी इस बार औसत अधिकतम तापमान और न्यूनतम गत वर्ष की तुलना में अधिक रहा है। वर्ष 2025 में यह 25.6 था और 11.3 डिग्री सेल्सियस था इस यह 26 और 12.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। डा. शमीम ने बताया कि गेहूं की इस स्टेज में तापमान बढ़ने को इसे टर्मिनल हीट स्ट्रेस कहा जाता है। इससे पश्चिम उप्र मेंं चार से आठ कुंतल प्रति हेक्टेयर उत्पादन गिर सकता है।