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    ग्रेटर नोएडा: जिस किराएदार को रोटी दी, उसी ने इकलौता बेटा छीन लिया; कोर्ट ने दी उम्रकैद

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 01:36 PM (IST)

    ग्रेटर नोएडा में फिरौती के लिए छात्र तरुण शर्मा का अपहरण और हत्या करने वाले दो दोषियों, अरुण और साजिद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने अपहरण, हत्या और सबूत मिटाने के आरोप में उन्हें दोषी पाया। मृतक के पिता ने 2018 में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस जांच में दोनों आरोपियों का हाथ सामने आया था।

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    कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा। प्रतीकात्मक तस्वीर

    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। फिरौती के लिए स्टूडेंट को किडनैप कर उसकी हत्या करने के दो दोषियों को उम्रकैद की सजा होगी। उन्होंने मकान मालिक के इकलौते बेटे को किडनैप कर उसकी हत्या की साजिश रची थी। ट्रायल पूरा होने के बाद एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज अभिषेक पांडे की कोर्ट ने इटावा जिले के आशा नंदपुर गांव के रहने वाले अरुण और गौतमबुद्ध नगर के देवला गांव के रहने वाले साजिद को दोषी करार देते हुए जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है।

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    एडिशनल क्राइम इंस्पेक्टर रतन सिंह भाटी ने बताया कि सूरजपुर कस्बा के रहने वाले सुभाष चंद्र शर्मा ने 13 अप्रैल 2018 को थाने में अपने इकलौते बेटे तरुण शर्मा (19) की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनका बेटा 12 अप्रैल की शाम को साईं मंदिर जाने की बात कहकर घर से निकला था। तब से वह वापस नहीं आया।

    उन्होंने यह भी बताया कि उनके अपार्टमेंट में किराएदार अरुण और साजिद अक्सर उनके घर आते थे। उन्होंने फोन करके तरुण को बुलाया था। जब बेटा घर नहीं लौटा तो परिवार वालों ने उसकी तलाश की। वहां के रहने वाले धर्मपाल शर्मा और नितिन शर्मा ने बताया कि उन्होंने उस शाम गुलिस्तानपुर के मंगल बाजार में तरुण को अरुण और साजिद के साथ मोमोज खाते और कोल्ड ड्रिंक पीते देखा था।

    पुलिस की जांच में पिता के दोनों लोगों पर लगे आरोप सही साबित हुए। बॉडी मिलने के बाद अरुण और साजिद को गिरफ्तार कर लिया गया और उनसे कड़ी पूछताछ की गई। पता चला कि दोनों आरोपी तरुण को अपने साथ ले गए थे। उन्होंने उसे किसी अनजान जगह पर नशीला पदार्थ दिया, गला घोंटा और रस्सी से गला घोंटकर मार डाला। उन्होंने बॉडी को घसीटकर झाड़ियों में छिपा दिया था और उसे कचरे और मिट्टी से ढक दिया था।

    पुलिस ने दोनों लोगों से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड और दूसरे सबूत जब्त करके फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह बात साबित हुई कि तरुण की गला घोंटकर हत्या की गई थी। पुलिस ने जांच पूरी करके कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल के दौरान सरकारी वकील ने आठ गवाह पेश किए।

    आरोपियों ने IPC की धारा 313 के तहत बयान दर्ज कराए, जिसमें आरोपों को बेबुनियाद बताया और खुद को बेगुनाह बताया। फिलहाल बचाव पक्ष ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सका। सारे सबूतों और डॉक्यूमेंट्स को एनालाइज़ करने के बाद, कोर्ट इस नतीजे पर पहुँचा कि अरुण और साजिद ने तरुण को अपने घर बुलाने की साज़िश रची थी।

    लोगों ने तरुण को उनके साथ देखा भी था। लाश झाड़ियों में छिपी मिली थी। पूरी घटना, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर, कोर्ट ने अरुण और साजिद को दोषी पाया। फ़ैसले में कहा गया कि आरोपियों के किडनैपिंग, मर्डर और सबूत मिटाने की कोशिश के आरोप पूरी तरह साबित हुए।

    इसलिए, उन्हें इंडियन पीनल कोड की धारा 364/34 (हत्या के इरादे से किडनैपिंग), 302/34 और 201 (सबूत मिटाना) के तहत दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई। दोनों पर ₹80,000-₹80,000 का जुर्माना भी लगाया गया। यह रकम जमा न करने पर आठ महीने 15 दिन की और जेल होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि आरोपियों से वसूले गए जुर्माने का 50 परसेंट मृतक के पिता सुभाष चंद्र शर्मा को दिया जाए।