जेल में कैसा था सुरेंद्र कोली का बर्ताव, निठारी कांड पर क्यों साध लेता था चुप्पी? सामने आया पूर सच
निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने जेल में 19 साल बिताए, जहां वह इस मामले पर हमेशा चुप्पी साधे ...और पढ़ें

सुरेंद्र कोली। फाइल फोटो
HighLights
सुरेंद्र कोली ने निठारी कांड पर जेल में चुप्पी साधी।
लुक्सर जेल में 35 कैदियों के साथ सामान्य व्यवहार रहा।
रिहाई के आदेश पर भी उसके हाव-भाव नहीं बदले।
जागरण संवाददाता, नोएडा। 18 सितंबर 2026 का दिन... दिन के लगभग 12 बजे के आसपास एक ऐसी खबर हरिद्वार से आई जिससे पूरा न्यूजरूम चौंक गया। हर किसी के मुंह से यही निकला क्या सुरेंद्र कोली... निठारी वाले सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या कर ली?
यह एक ऐसी खबर है जो हर किसी को 20 साल पुराने उस खौफनाक वारदात की याद दिलाती है। कैसे-कैसे पूरे देश में छोटे-छोटे बच्चों के हत्या की खबर फैली और फिर कैसे निठारी की कोठी का मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर और उसका नौकर सुरेंद्र कोली चर्चा में आए। फिर दोनों 19 साल जेल में रहे और पिछले ही साल नवंबर के महीने में सुरेंद्र कोली सभी केसों से बरी होकर जेल से छूट गया।
19 साल जेल में रहे और रिहा होने के एक साल बाद ही आत्महत्या करने वाले सुरेंद्र कोली का लुक्सर जेल में व्यवहार कैसा रहा, वह वहां कैसे रहता था इसकी पूरी कहानी हम आपको अपनी इस स्टोरी में बता रहे हैं....
35 कैदियों के साथ था बंद
सुरेंद्र कोली ने निठारी कांड को लेकर जेल में कभी कुछ नहीं कहा। 19 साल जेल में रहा सुरेंद्र कोली आठ सितंबर 2024 से चार महीने चार दिन तक लुक्सर स्थित जिला जेल में बंद रहा।
वह जेल की बैरक नंबर वन ई में 35 कैदियों के साथ बंद था। पिछले 14 महीने के अंतराल में उससे उसका बेटा, पत्नी, भाई व वकील ही दिलासा देने पहुंचते थे। पत्नी व बेटे हर तीन चार महीने में एक बार ही मिलने आते थे।
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सिर्फ वकील से करता था बात
निठारी कांड को लेकर वह सिर्फ अपने वकील से ही बातचीत करता था। 35 कैदियों में उसकी आठ कैदियों के साथ अच्छी दोस्ती हो गई थी। उन्हीं के साथ उठता बैठता व खाता-पीता था।
जेल में मिलने वाली सामग्री के साथ वह दोस्त कैदियों के कपड़े समेत अन्य सामग्री इस्तेमाल करता था। बहुचर्चित निठारी कांड को लेकर कैदी साथियों के मन में जानने की जिज्ञासा रहती, लेकिन इस पर चर्चा शुरू होते ही वह पूरी तरह चुप्पी साध लेता था।
निठारी पर सदा रहा मौन
हालांकि कैदी साथियों के साथ वह तमाम तरह की चर्चा करता था। जेल प्रशासन ने भी कई बार निठारी कांड की सच्चाई जानने की कोशिश की, लेकिन इस बारे में वह हमेशा चुप्पी साधे रहा।
जेल प्रशासन की मानें तो रिहाई का आदेश पता चलने के बाद भी उसके चेहरे पर हाव-भाव बिल्कुल नहीं बदले। रोजाना की तरह ही जेल परिसर में मिलने वाला खाना अपने साथियों से साथ खाया। जेल अधीक्षक बृजेश कुमार ने बताया कि जेल परिसर में उसकी स्थिति बिल्कुल सामान्य रही।
