स्विट्जरलैंड जैसा फील और कोहरे में भी लैंडिंग, जेवर एयरपोर्ट की वे 6 खूबियां जो इसे बनाएंगी दुनिया का 'सुपर हब'
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का 25 साल पुराना सपना अब पूरा होने जा रहा है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे। 2 ...और पढ़ें

25 साल बाद नोएडा एयरपोर्ट से सफर होगा शुरू। फाइल फोटो
डिजिटल डेस्क, नोएडा। लंबे इंतजार के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तैयार होने का सपना पूरा हो रहा है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे, जिसके बाद जेवर एयरपोर्ट से देश के प्रमुख शहरों के लिए हवाई यात्राएं शुरू होंगी।
राजनाथ सिंह ने 2001 में रखा था एयरपोर्ट का प्रस्ताव
इसके साथ ही अब 25 साल पहले देखा गया जेवर एयरपोर्ट का सपना अब पूरा होने को है। साल 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) का प्रस्ताव पेश किया था।
इसके दो साल बाद अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार ने एयरपोर्ट के लिए बनाई गई तकनीकी व्यवहार्यता की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था।

कार्गो की तस्वीर
13 साल बाद पंख को मिले परवाज
इसके बाद की सरकारों ने इस एयरपोर्ट को कभी हरियाणा, कभी राजस्थान कभी यूपी के अन्य शहर ले जाने की कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ। फिर आया साल 2014 और इसी साल इस योजना को नई उड़ान मिली।
2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छे दिन के सपने दिखाते हुए कहा था कि उनका सपना है कि हवाई चप्पल पहनने वाला हवाई सफर कर सके।
जिस 1334 हेक्टेयर जमीन पर एयरपोर्ट का निर्माण हुआ है उस जमीन पर कभी बुग्गी, ट्रैक्टर और साइकिल से सफर करने वाले किसानों को हवाई जहाज से सफर की उम्मीद है। किसानों का मानना है कि उनके जमीन और घरों का त्याग को आने वाली पीढ़ी याद करेंगी। जिसकी वजह से जेवर क्षेत्र और प्रदेश का आर्थिक विकास संभव हुआ है।
इस स्टोरी में पढ़ें जेवर एयरपोर्ट की विकास यात्रा....
26 नवंबर 2021 को रखी गई नींव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 नवंबर 2021 को यूपी में जेवर के पास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की नींव रखी थी। लगभग साढ़े चार साल बाद एयरपोर्ट के पहले चरण का काम पूरा हो चुका है। इसका निर्माण चार चरण में किया जाना है। जब यह एयरपोर्ट पूरी तरह से बन जाएगा तब यह एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा।

नंबर जो हैं खास
1334 हेक्टेयर
एयरपोर्ट के पहले चरण का निर्माण 1334 हेक्टेयर पूरा हुआ है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत जेवर एयरपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है। इस एयरपोर्ट को डेवलप करने का दायित्व नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का है जिसमें स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी बड़ी भूमिका में है। इस काम के लिए ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी की 100 फीसदी सहायक कंपनी यमुना इंटरनेशनल प्रा. लि. की स्थापना की गई है, जो 40 साल तक एयरपोर्ट का संचालन और रखरखाव करेगी।
5100 हेक्टेयर
5100 हेक्टेयर में विस्तृत जेवर एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद जेवर एयरपोर्ट इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब ढाई गुना ज्यादा बड़ा होगा।
3900 मीटर
3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे प्रथम चरण में बनकर तैयार है। इस हवाई अड्डे पर कुल छह रनवे बनाने की योजना है।
निर्माण की लागत

29561 करोड़ रुपये है जेवर एयरपोर्ट की कुल अनुमानित लागत। 2050 तक जेवर एयरपोर्ट के सभी चार चरण का निर्माण कार्य संपन्न करने की योजना है।
- 4588 करोड़ रुपये प्रथम चरण की लागत
- 5983 करोड़ रुपये द्वितीय चरण के निर्माण पर खर्च होंगे।
- 8415 करोड़ रुपये तृतीय चरण के निर्माण की लागत आएगी।
- 10575 करोड़ रुपये चतुर्थ चरण की अनुमानित लागत होगी।
(मुद्रास्फीति बढ़ने के साथ ही प्रत्येक चरण की संभावित लागत का अनुमान व्यक्त किया गया है।)

फेजवाइज क्या होगी सालाना यात्री क्षमता

पर्यावरण की चिंता
इस एयरपोर्ट की खास बात ये है कि इसके ऊर्जा जरूरतों का 55 प्रतिशत हरित ऊर्जा के माध्यम से पूरा होगा। इसके टाटा पावर के सहयोग से सोलर पैनल लग चुके हैं, जिससे 13 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
वहीं पवन ऊर्जा से 10.8 फीसदी ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य है। सभी सुविधाओं के लिए बिजली चालित वाहन व मशीनों का ही इस्तेमाल होगा ताकि कार्बन उत्पाद शून्य किया जा सके।
अल्ट्रा मॉडर्न टेक्निक से होगा लैस
- जेवर एयरपोर्ट रनवे को रनवे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी अल्ट्रा मॉडर्न क्षमताओं से लैस किया गया है। घने कोहरे, भारी बारिश और खराब मौसम के दौरान 50 मीटर तक की बहुत कम रनवे दृष्यता की स्थिति में भी विमानों का आवागमन जारी रह सकता है।
- एयरपोर्ट में सालाना 2.5 मीट्रिक टन क्षमता वाला एक मल्टी-माडल कार्गो हब है। जेवर एयरपोर्ट को एविएशन हब के तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें मेंटेंनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग और एयर कार्गो की सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।
- एयरपोर्ट पर 24 कोड-सी (मध्यम आकार के विमान जिनके पंखों की चौड़ाई 24 मीटर से अधिक लेकिन 36 मीटर से कम) और 2 कोड-डी और एफ विमान के लिए पार्किंग स्टैंड बनाए गए हैं।
- एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग कैटेगरी 9 की हाई सिक्योरिटी कैटेगरी में शामिल किया गया है। जिसमें हवाई अड्डों पर विमान दुर्घटनाओं, आपातकालीन लैंडिंग और आग से संबंधित घटनाओं में बचाव व अग्निशमन कार्य शामिल होते हैं। इसकी वजह से यहां बोइंग 777 जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव होगा।
CISF के हाथ सुरक्षा की कमान
जेवर एयरपोर्ट की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के हाथ में है। पहले चरण में सीआईएसएफ के 1047 कर्मी तैनात होंगे।
किन एयरलाइंस ने दी पहले चरण में ऑपरेशंस की सहमति
- इंडिगो
- आकासा एयर
- एयर इंडिया एक्सप्रेस
किन शहरों तक शुरुआती उड़ान
- वाराणसी
- लखनऊ
- अहमदाबाद
- मुंबई
- बेंगलुरू
- हैदराबाद
- जयपुर
- चेन्नई
- पटना
- कानपुर
- श्रीनगर
माना जा रहा है कि औसत यहां से शुरुआत में रोजाना 150 उड़ानें संचालित होंगी।
प्रमुख स्थानों से जेवर एयरपोर्ट की दूरी
| स्थान | जेवर एयरपोर्ट से दूरी |
|---|---|
| इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (दिल्ली) | 72 किमी |
| नोएडा | 52 किमी |
| आगरा | 130 किमी |
| दादरी स्थित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब | 90 किमी |
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