नोएडा के उद्यमियों की दोटूक: 21% वेतन वृद्धि से बंधे 'हाथ-पैर', व्यापार शिफ्ट होने का खतरा
नोएडा के उद्यमी न्यूनतम वेतन में 21% की वृद्धि से चिंतित हैं। उनका कहना है कि महंगाई कम होने के बावजूद इतनी बड़ी वृद्धि से उद्योगों की आर्थिक गति प्रभ ...और पढ़ें

नोएडा के उद्यमी न्यूनतम वेतन में 21% की वृद्धि से चिंतित हैं। इमेज एआई
जागरण संवाददाता, नोएडा। श्रमिकों के आंदोलन के बाद न्यूनतम वेतनमान बढ़ाने की हाई पावर की कमेटी के आदेश के बाद उद्यमी अब खुद के हाथ बंधे हुए महसूस कर रहे हैं। उद्यमियों ने बृहस्पतिवार को हाई पावर कमेटी के साथ बैठक में कहा कि एक तरफ महंगाई दर साढ़े तीन प्रतिशत के करीब है और वेतनमान 21 प्रतिशत बढ़ा दिया है।
इतने बड़े अंतर में वेतन वृद्धि करने से उद्योगों के आर्थिक गति पर गहरा असर पड़ेगा। उत्पादों के मूल्य बढ़ाने पर ग्राहक छिटक सकते हैं, क्योंकि पड़ोसी राज्य जैसे कि उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश मेंं वेतन नहीं बढ़ा है। ऐसे में उन्हें कम पैसे में माल उपलब्ध होगा और वह उन राज्यों की ओर अपना व्यापार शिफ्ट कर देंगे।
ऐसे ही अन्य बिंदुओं को कमेटी के सामने रखा गया। कमेटी के अध्यक्ष व औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि इन बिंदुओं को शामिल करते हुए रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार, जिलाधिकारी मेधा रूपम, मेरठ मंडल के आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी, उपायुक्त उद्योग पंकज निर्वाण और अपर श्रम आयुक्त राकेश द्विवेदी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इंडस्ट्रियल एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन (आइईए) अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि 21 प्रतिशत की अचानक वृद्धि का निर्णय का व्यापक असर उद्योगों पर पड़ने की संभावना है। ईएसआइ पीएफ और बोनस को जोड़ने पर कुल लागत लगभग 26 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।
इससे एमएसएमई के कुल लाभ लगभग तीन प्रतिशत तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में ग्राहक कीमतों में वृद्धि करने को तैयार नहीं हैं। ईरान-अमेरिका में चल रहे युद्ध के कारण पहले से ही कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और एलपीजी की समस्या से एमएसएमई संकट झेल रहा है।
गौतमबुद्ध नगर के उद्योगों के लिए विशेष सब्सिडी प्रदान की जाए, लघु उद्योग के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित दिया जाए वेतन वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करने को कर या अन्य वित्तीय राहत दी जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो रोजगार और अर्थव्यवस्था दोनों पर बड़ा असर प्रभाव पड़ेगा।
नोएडा एंटरप्रिन्योर्स एसोसिएशन (एनईए) के अध्यक्ष विपिन कुमार मल्हन ने कहा कि सरकार और प्रशासन ने बार-बार यह संदेश दिया कि वे श्रमिकों के साथ हैं, लेकिन यह नहीं कहा कि उद्यमी भी उनके साथ हैं। इस बात ने उद्यमी वर्ग को थोड़ा आहत किया है।
पिछले 50 वर्षों से नोएडा और गौतमबुद्ध नगर में उद्यमियों व श्रमिकों का रिश्ता सामंजस्य भरा रहा है। यही कारण है कि क्षेत्र उत्तर प्रदेश का शो-विंडो बनकर उभरा है। सुझाव दिया कि पूरे देश में श्रमिकों का वेतन एक समान रखा जाए और शहर के मुताबिक महंगाई भत्ता के मद तय किया जाए।
श्रमिकों के लिए सस्ते घर बनाए जाएं, जिससे उनके आवास की परेशानी दूर हो। श्रमिकों का पीएफ और ईएसआइ में कटने वाला योगदान उनके खाते में सीधे दे दिया जाए, ताकि उनकी इन-हैंड सैलरी बढ़ सके।
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