असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा अब केवल पांच विषयों के लिए, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 33 में से केवल पांच ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के असिस्टेंट प्रोफेसर पद के अभ्यर्थियों के लिए सभी विषयों की पुनर्परीक्षा आयोजित करने के फैसले में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि संपूर्ण लिखित परीक्षा को रद करना अनुचित है, क्योंकि पेपर लीक के साक्ष्य स्पष्ट रूप से 33 में केवल पांच विषयों तक सीमित थे।
हाई कोर्ट ने एकलपीठ के पूर्व आदेश के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए शुक्रवार को यह आदेश पारित किया।हरविंदर सिंह व दो अन्य की विशेष अपील पर बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल श्रीपत व इशिर श्रीपत ने कोर्ट को बताया कि 33 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर चयन के लिए क्रमश: 16 और 17 अप्रैल, 2025 को लिखित परीक्षा हुई थी।
पेपर लीक के आरोपों की जांच के बाद आयोग और राज्य सरकार ने सभी विषयों के लिए नए सिरे से परीक्षा का आदेश दिया था। जांच में आयोग के संविदा कर्मचारी महबूब अली और 18 अभ्यर्थियों की संलिप्तता सामने आई। न्यायालय ने पाया कि पेपर लीक के स्थापित साक्ष्यों से केवल पांच विशिष्ट विषयों उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान के अभ्यर्थियों को लाभ हुआ।
प्राथमिकी दर्ज होने के साल भर बाद भी ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है जिससे यह तथ्य पुष्ट हो कि शेष 28 विषय भी प्रभावित हैं, जिनमें 682 पद हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि दागदार और बेदाग अभ्यर्थियों को अलग किया जा सकता है। यद्यपि न्यायालय ने अंतिम समय में होने वाली असुविधा से बचने के लिए 18 अप्रैल, 2026 को निर्धारित पुनर्परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन कहा कि 28 बेदाग विषयों के लिए पुनर्परीक्षा का मूल्यांकन नहीं होगा।
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आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह 28 बेदाग विषयों (जैसे अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, कानून, इतिहास, भौतिकी आदि) के अभ्यर्थियों के लिए 18 अप्रैल, 2026 को होने वाली पुनर्परीक्षा की ओएमआर शीट का मूल्यांकन न करे। पुनर्परीक्षा का मूल्यांकन केवल पांच दागदार विषयों उर्दू, समाजशास्त्र, जंतु विज्ञान, हिंदी और भूगोल तक सीमित रहेगा।
आदेश में कहा गया है कि अंतिम साक्षात्कार चरण के लिए आयोग को 28 बेदाग विषयों के लिए अप्रैल 2025 की मूल परीक्षा से शार्टलिस्ट अभ्यर्थियों को संकलित करना होगा और उन्हें पांच दागदार विषयों के लिए पुनर्परीक्षा से नए शार्टलिस्ट उम्मीदवारों के साथ मिलाना होगा।
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